◆ 180 यात्रियों की जान बचाने वाले पायलट के साहस का पाठक ने किया उल्लेख
अयोध्या। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि भारतीय संस्कृति में मानव जीवन की रक्षा को सर्वोच्च महत्व दिया गया है। हाल में विमान में सवार 180 यात्रियों की जान बचाने वाले पायलट स्मित मच्छार के साहस और सूझबूझ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस घटना ने दुनिया को भारतीय संस्कृति के मानवीय मूल्यों का परिचय कराया है।
रविवार को रामकथा पार्क में वशिष्ठ फाउंडेशन ट्रस्ट की ओर से पंडित उमापति त्रिपाठी की 233वीं जयंती पर आयोजित सम्मान समारोह में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित उमापति त्रिपाठी सनातन संस्कृति के प्रति समर्पित विद्वान थे। उन्होंने कहा कि अयोध्या की सनातन परंपरा और संस्कृति के संरक्षण में संतों और विद्वानों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आज अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के साथ भारतीय संस्कृति की ओर दुनिया का ध्यान आकर्षित हुआ है। उन्होंने कहा कि संस्कृति के संरक्षण के साथ गरीबों का कल्याण भी सरकार की प्राथमिकता है।
समारोह में जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर को इस वर्ष के वशिष्ठ सम्मान से सम्मानित किया गया। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक एवं महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने उन्हें 51 हजार रुपये, सम्मान पत्र एवं अंगवस्त्र प्रदान किया। वहीं भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारी बृजनंदन ब्रह्मचारी की स्मृति में प्रदान किया जाने वाला बृजनंदन सम्मान दि आयुष्मान फाउंडेशन को दिया गया। फाउंडेशन की ओर से पवन पटेल एवं उनके सहयोगियों ने सम्मान ग्रहण किया।
कार्यक्रम का आयोजन वशिष्ठ फाउंडेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने किया। उन्होंने अतिथियों का स्वागत करते हुए अयोध्या की सनातन संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में संत-महंतों की भूमिका पर प्रकाश डाला। संचालन विद्वान रघुनाथ दास शास्त्री ने किया।
वात्सल्य भाव से की प्रभु राम की आराधना
प्रख्यात विद्वान महंत मिथिलेशनंदिनी शरण ने कहा कि पंडित उमापति त्रिपाठी ने अपने सदाचरण और साधना के माध्यम से भगवान श्रीराम की वात्सल्य भाव से आराधना की। संस्कृत और हिंदी में उनकी अनेक रचनाएं हैं, जिनमें दर्शन, अध्यात्म और रसोपासना प्रमुख विषय रहे हैं।
2018 में शुरू हुआ वशिष्ठ सम्मान
महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने बताया कि पंडित उमापति त्रिपाठी की स्मृति और उनके साहित्यिक-सांस्कृतिक योगदान को अक्षुण्ण बनाए रखने के उद्देश्य से वर्ष 2018 में वशिष्ठ सम्मान की शुरुआत की गई थी। पहला सम्मान अयोध्या के विद्वान पं. विश्वेश्वरी प्रसाद शुक्ल ‘ब्रह्मचारी’ को प्रदान किया गया था। इसके बाद यह सम्मान ब्रह्मानंद पाठक, मणिरामदास छावनी के महंत नृत्यगोपाल दास तथा राजगोपाल मंदिर के पूर्व महंत स्व. कौशल किशोर शरण फलाहारी सहित विभिन्न संतों एवं विद्वानों को दिया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि क्रांतिकारी बृजनंदन ब्रह्मचारी का जन्म सिद्धार्थनगर के इंडवाघाट में हुआ था। विद्याध्ययन के लिए वह अयोध्या आए और श्री तिवारी मंदिर में रहकर संस्कृत की शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 1923 में अयोध्या में हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन की बैठक आयोजित कराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वह चंद्रशेखर आजाद के निकट सहयोगियों में शामिल थे और वर्ष 1929 में दिल्ली सेंट्रल जेल में भी रहे।
बृजनंदन ब्रह्मचारी की स्मृति में दिए जाने वाले सम्मान से अब तक श्रीराम अवध अंध विद्यालय, दूरदर्शन लखनऊ के आत्म प्रकाश, गौरीशंकर गवैया और डॉ. चैतन्य सहित विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाली हस्तियों को सम्मानित किया जा चुका है।
रूपेश मिश्र के गीतों पर झूमे श्रोता
समारोह में हिंदी एवं भोजपुरी फिल्मों के पार्श्व गायक रूपेश मिश्र और उनके साथियों ने गीतों की प्रस्तुति दी। गीतों पर श्रोताओं ने देर तक तालियां बजाईं और कार्यक्रम का आनंद लिया।
समारोह में मणिरामदास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास, रामभूषण दास कृपालु जी महाराज, महंत अनंताचार्य, महंत अवधेश दास, महंत जनमेजय शरण, अधिकारी राजकुमार दास, जिला पंचायत अध्यक्ष रोली सिंह, विधायक रामचंद्र यादव एवं अभय सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष राधेश्याम त्यागी, पूर्व जिलाध्यक्ष कमला शंकर पांडे, अभिषेक मिश्र, मुकेश सिंह, चंद्रभान सिंह सहित संत-महंत, विद्वान एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे।