अयोध्या। रक्षाबंधन सिर्फ भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने वाला पर्व नहीं है, बल्कि इसका सकारात्मक असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। भाई-बहन के बीच प्यार, अपनापन और साथ रहने से शरीर में ऑक्सीटोसिन जैसे हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है, जो तनाव कम करने और भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाने में मदद करता है। यह जानकारी जिला चिकित्सालय के मनोविश्लेषक डॉ. आलोक मनदर्शन ने रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर दी।
डॉ. आलोक ने बताया कि भाई-बहन के बीच स्नेह और भावनात्मक जुड़ाव से तनाव से संबंधित हार्मोन कॉर्टिसोल को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही खुशी और उत्साह से जुड़े रसायनों के सक्रिय होने से व्यक्ति का मूड बेहतर होता है और मन में सकारात्मक भावनाएं बढ़ती हैं।
उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन पर परिवार के साथ समय बिताना, घूमना-फिरना, बातचीत करना, हंसी-मजाक और साथ भोजन करना मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। भाई-बहन के बीच मन की बातें साझा करने से भावनात्मक सहारा मिलता है, जिससे तनाव, चिंता और अकेलेपन जैसी स्थितियों से निपटने में मदद मिलती है।
डॉ. आलोक के अनुसार, भाई-बहन का मजबूत भावनात्मक रिश्ता व्यक्ति को मुश्किल समय में सहारा देता है। परिवार के साथ बिताए सुखद पल लंबे समय तक यादों में बने रहते हैं और संतुष्टि व आत्मीयता का एहसास कराते हैं। रक्षाबंधन पर राखी बांधना और उपहारों का आदान-प्रदान भी आपसी स्नेह और रिश्ते की मजबूती का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि आज के समय में अकेलापन, तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। ऐसे में परिवार और करीबी रिश्तों से मिलने वाला भावनात्मक सहयोग महत्वपूर्ण है। भाई-बहन का स्नेह व्यक्ति को भावनात्मक रूप से मजबूत बनाने में सहायक हो सकता है।
उन्होंने कहा कि प्यार पाना और प्यार देना मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण भावनात्मक जरूरत है। रक्षाबंधन इसी स्नेह और आपसी जुड़ाव को मजबूत करने का अवसर है। इसलिए इस पर्व को केवल परंपरा तक सीमित न रखकर परिवार के साथ समय बिताने और रिश्तों में अपनापन बढ़ाने के अवसर के रूप में भी मनाना चाहिए।