◆ जिला चिकित्सालय के पास 300 वर्गमीटर जमीन की तलाश, पहले चरण में चार मंडलों में अयोध्या शामिल
अयोध्या । जिले में दिव्यांगजनों के लिए जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र (डीडीआरसी) स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रदेश में पहले चरण में जिन चार मंडलों को केंद्र के भवन निर्माण के लिए शामिल किया गया है, उनमें अयोध्या भी है। केंद्र के निर्माण के लिए करीब 300 वर्गमीटर भूमि की आवश्यकता है। जिला चिकित्सालय के निकट अथवा उसके आसपास जमीन तलाशने की प्रक्रिया चल रही है। भवन निर्माण के लिए तीन करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के निदेशक ने जिलाधिकारी को भेजे पत्र में शासन के निर्णय के तहत प्रत्येक मंडल मुख्यालय पर जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र स्थापित किए जाने की जानकारी दी है। प्रदेश के सभी 18 मंडल मुख्यालयों पर केंद्रों की स्थापना और संचालन की प्रक्रिया चल रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की स्वीकृत वार्षिक कार्ययोजना में पहले चरण में लखनऊ, प्रयागराज, अयोध्या और मीरजापुर में डीडीआरसी के भवन निर्माण को शामिल किया गया है।
केंद्र के लिए जिला चिकित्सालय के निकट भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। इसके पीछे दिव्यांगजनों के लिए चिकित्सा और पुनर्वास सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने का उद्देश्य है। जिला प्रशासन स्तर पर भूमि चयन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण संबंधी कार्य आगे बढ़ेगा।
फिजियोथेरेपी और स्पीच थेरेपी की मिलेगी सुविधा
जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी चंद्रेश त्रिपाठी ने बताया कि केंद्र में दिव्यांगजनों का सर्वेक्षण और पहचान, प्रारंभिक हस्तक्षेप, दिव्यांगता की रोकथाम को लेकर जागरूकता, कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण उपलब्ध कराने तथा सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने संबंधी सेवाएं दी जाएंगी।
केंद्र में फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी, ऑडियोलॉजी और काउंसलिंग की सुविधा भी प्रस्तावित है। इसके अलावा शिक्षकों, अभिभावकों और समुदाय के लोगों के लिए अभिमुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
भवन में कार्यालय कक्ष, सामान्य कक्ष, कार्यशाला, ऑडियोलॉजी एवं स्पीच थेरेपी कक्ष, फिजियोथेरेपी कक्ष और काउंसलिंग कक्ष सहित आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
सहायक उपकरण और योजनाओं की जानकारी भी मिलेगी
केंद्र के माध्यम से दिव्यांगजनों को पुनर्वास से जुड़ी विभिन्न सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी। सहायक उपकरणों की उपलब्धता, काउंसलिंग, थेरेपी और सरकारी योजनाओं से संबंधित जानकारी एवं सहायता भी दी जाएगी। इससे दिव्यांगजनों को चिकित्सा, पुनर्वास और सरकारी सहायता से जुड़ी सेवाओं के लिए अलग-अलग स्थानों पर जाने की आवश्यकता कम होगी।