अयोध्या। राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद, नई दिल्ली, भारतीय सिंधू सभा अयोध्या एवं सिंधु सांस्कृतिक एवं संरक्षण समिति के संयुक्त तत्वावधान में “विभाजन विभीषिका और सिंधी समाज : स्मृतियां एवं संकल्प” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में 1947 के विभाजन के दौरान सिंधी समाज द्वारा झेली गई पीड़ा, विस्थापन और संघर्ष की स्मृतियों को साझा करते हुए सामाजिक एकजुटता एवं मानवता को मजबूत करने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में इतिहास संकलन समिति अवध प्रांत की अध्यक्ष आचार्य प्रज्ञा मिश्रा, प्रमुख समाजसेविका डॉ. आभा सिंह एवं सिंधी सेंट्रल पंचायत के मुखिया पवन जीवनी शामिल हुए। वक्ताओं ने कहा कि विभाजन केवल देश की सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि लाखों परिवारों के जीवन, सपनों और स्मृतियों का भी विस्थापन था। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर, परिवार, व्यापार और जन्मभूमि छोड़कर भारत के विभिन्न हिस्सों में शरण लेनी पड़ी।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए सिंधी रिसर्च स्कॉलर विवेक अमलानी ने सिंध की स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने कहा कि विभाजन की त्रासदी को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है, ताकि इतिहास की पीड़ा से सीख लेकर समाज और राष्ट्र को और मजबूत बनाया जा सके। उन्होंने उपस्थित लोगों को अखंड भारत की भावना, सामाजिक एकता और राष्ट्रहित के लिए कार्य करने का संकल्प दिलाया।
मुख्य अतिथियों ने कहा कि विभाजन विभीषिका की स्मृतियां हमें नफरत और हिंसा के बजाय शांति, सद्भाव, भाईचारे और एकजुटता का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देती हैं। सिंधी समाज के संघर्ष और बलिदान को याद करते हुए सभी ने समाज को संगठित और संस्कारों से जुड़ा रखने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में विभाग प्रचारक कृष्ण चंद्र, महानगर प्रचारक सुदीप, साय प्रचारक, विभाग सहसंचालक मुकेश, डॉ. आरके सिंह सहित सिंधी समाज के देव कुमार, राजकुमार मोटवानी, गिरधारी चावला, सुशील केसवानी, सुनील रामानी, रोशन तोलानी, धनेश बजाज, हरीश मध्यान, कमलेश केवलानी, रूपन सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। महिलाओं में नेहा अमलानी, मधु सावलानी, खुशी आहूजा, संगीता सेहता, साक्षी वासवानी, वाणी अमलानी और कीर्ति सावलानी मौजूद रहीं। कार्यक्रम का संचालन एंकर रितिका केवलानी ने किया।
सिंधु सांस्कृतिक एवं संरक्षण समिति के अध्यक्ष संतोष सेहता, महामंत्री महेश आहूजा, विशाल लालवानी, अमर सावलानी, तरुण केवलानी, नवीन केवलानी, घनश्याम अमलानी, ओम रमानी, उत्तम रावलानी, अनूप रावलानी एवं आनंद सावलानी ने आयोजन में सहभागिता करते हुए समाज की एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का संदेश दिया।