Wednesday, August 12, 2026
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तिरंगे के रंगों से जुड़ा है ‘हैप्पी हार्मोन’ कनेक्शन, राष्ट्रीय पर्व बढ़ाते हैं देशभक्ति का जज्बा


अयोध्या। राष्ट्रीय पर्व की आहट के साथ ही लोगों में उत्साह और उमंग बढ़ने लगती है। तिरंगा, राष्ट्रगान और देशभक्ति से जुड़े आयोजन मन-मस्तिष्क में राष्ट्र के प्रति समर्पण और गर्व की भावनाओं को और मजबूत करते हैं। मनोविश्लेषक डॉ. आलोक मनदर्शन के अनुसार राष्ट्रीय पर्व बचपन और स्कूली दिनों में संचारित राष्ट्रभाव को पुनर्जीवित करने का काम करते हैं।

हर घर तिरंगा अभियान के संदर्भ में जारी मनोविश्लेषण वार्ता में डॉ. आलोक मनदर्शन ने बताया कि राष्ट्रीय पर्व लोगों को एक तरह के मानसिक ‘फ्लैश बैक’ में ले जाते हैं। बचपन में स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस की तैयारियों के दौरान देशभक्ति गीत, नाटक, भाषण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने की स्मृतियां इन पर्वों के आसपास फिर जीवंत हो उठती हैं। इससे लोगों में उत्साह, उमंग और राष्ट्र के प्रति जुड़ाव की अनुभूति बढ़ती है।

उन्होंने बताया कि यह मनोदशा पर्व से कुछ दिन पहले शुरू होकर पर्व के बाद भी कुछ समय तक बनी रह सकती है। मनोविश्लेषण की भाषा में इसे ‘पैट्रियाटिक स्पर्ट’ यानी देशभक्ति आवेग के रूप में देखा जा सकता है। वैसे देशभक्ति प्रत्येक नागरिक के भीतर मौजूद स्थायी भाव है, लेकिन राष्ट्रीय पर्व इसे एक तरह के ‘बूस्टर डोज’ की तरह और प्रबल कर देते हैं।

डॉ. मनदर्शन के मुताबिक इन भावनाओं में मस्तिष्क के विभिन्न मनोरसायनों की भी भूमिका होती है। सेरोटोनिन और डोपामिन जैसे ‘फील गुड’ रसायन सकारात्मक अनुभूति को बढ़ाते हैं, जबकि एंडोर्फिन उत्साह और उमंग जैसी भावनाओं से जुड़ा होता है। वहीं ऑक्सीटोसिन सामाजिक जुड़ाव और अपनत्व की भावनाओं में भूमिका निभाता है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान जैसे प्रतीकात्मक माध्यम इन भावनाओं को और सक्रिय करने वाले उत्प्रेरक की भूमिका निभा सकते हैं। तिरंगे को देखते ही बचपन की स्मृतियों, स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र के प्रति गौरव से जुड़े भाव एक साथ सक्रिय हो जाते हैं। यही कारण है कि राष्ट्रीय पर्व के दौरान सामाजिक और व्यक्तिगत भिन्नताएं कुछ समय के लिए पीछे छूटती हुई नजर आती हैं और लोग एक साझा राष्ट्रभाव से जुड़ते दिखाई देते हैं।

डॉ. आलोक मनदर्शन ने कहा कि राष्ट्रीय पर्व केवल कैलेंडर की तारीख नहीं, बल्कि सामूहिक स्मृति और राष्ट्रभाव को पुनर्जीवित करने वाले अवसर हैं। तिरंगा अभियान इसी सामूहिक भावना को परिवार, समाज और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बन सकता है।

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