◆ विश्व मस्तिष्क दिवस की पूर्व संध्या पर मानसिक स्वास्थ्य के प्रति किया जागरूक
अयोध्या। विश्व मस्तिष्क दिवस (22 जुलाई) की पूर्व संध्या पर जिला चिकित्सालय के मनोपरामर्शदाता डॉ. आलोक मनदर्शन ने कहा कि मानव मस्तिष्क एक सुपर कम्प्यूटर की तरह कार्य करता है, जबकि मन (माइंड) उसका अत्यंत संवेदनशील सॉफ्टवेयर है। यदि मानसिक संतुलन बिगड़ता है तो इसका सीधा प्रभाव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली पर पड़ता है और कई मानसिक एवं शारीरिक रोग जन्म ले सकते हैं।
उन्होंने बताया कि मस्तिष्क के तीन प्रमुख भाग प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (निर्णय लेने वाला भाग), एमिग्डाला (खतरे का आकलन करने वाला भाग) और हिप्पोकैंपस (स्मृतियों का भंडार) हैं। इनकी कार्यप्रणाली प्रभावित होने पर एंग्जायटी डिसऑर्डर, मूड डिसऑर्डर, साइकोसिस तथा मनोशारीरिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। व्यक्तित्व विकार, जीवन की दुखद घटनाएं, नशे की लत, पारिवारिक तनाव और मानसिक रोगों का पारिवारिक इतिहास इसके प्रमुख कारण हैं।
डॉ. मनदर्शन ने कहा कि पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद मस्तिष्क की बैटरी को चार्ज करने और तनाव को कम करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। लगातार तनाव बढ़ने पर शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे घबराहट, चिड़चिड़ापन, क्रोध, अत्यधिक चिंता, अनिद्रा, नशे की प्रवृत्ति, पाचन संबंधी समस्याएं और हृदय पर दबाव बढ़ने जैसी समस्याएं सामने आती हैं। लंबे समय तक उच्च रक्तचाप बने रहने से ब्रेन स्ट्रोक, लकवा और मिर्गी जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बढ़ती उम्र में अल्जाइमर और पार्किंसन रोग की आशंका भी अधिक हो सकती है।
उन्होंने बताया कि नियमित व्यायाम, योग एवं ध्यान, संगीत, हंसी, प्राकृतिक वातावरण में भ्रमण, सामाजिक सहभागिता और पर्याप्त नींद से मस्तिष्क स्वस्थ रहता है। साथ ही ओमेगा-3 फैटी एसिड, एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन और खनिजों से भरपूर आहार जैसे वसायुक्त मछली, मेवे, बीज, पत्तेदार सब्जियां, अंडे, हल्दी और डार्क चॉकलेट मस्तिष्क की कोशिकाओं को सुरक्षित रखने में सहायक होते हैं। उन्होंने लोगों से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और समय पर विशेषज्ञ से परामर्श लेने की अपील की।