Tuesday, July 21, 2026
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अनुशासनहीन छात्रों को दी जा रही है ‘रामनाम’ लिखने की सजा


◆ राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज में कर्मचारियों और तीमारदारों को भी मिल रही प्रेरणा


अयोध्या। राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज में अनुशासन और संस्कार का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। कॉलेज प्रशासन ने अनुशासनहीन मेडिकल छात्रों को पारंपरिक दंड की बजाय रामनाम लिखने’ की सजा देने का निर्णय लिया है। प्रिंसिपल डा. सत्यजीत वर्मा का कहना है कि यह सजा नहीं, बल्कि एक संस्कारिक अभ्यास है जो विद्यार्थियों में संयम, धैर्य और नैतिकता का भाव उत्पन्न करेगा।

डा. वर्मा ने बताया कि निरीक्षण के दौरान यदि किसी कर्मचारी, छात्र या तीमारदार में लापरवाही या अनुशासनहीनता देखी जाती है, तो उन्हें रामनाम लिखने के लिए कहा जाता है। उन्होंने कहा — रामनाम लिखने से मन की अशांति दूर होती है और व्यक्ति में अच्छे संस्कार विकसित होते हैं। यह कोई दंड नहीं बल्कि आत्म-सुधार का माध्यम है।”

दिलचस्प बात यह है कि यह पहल कॉलेज परिसर में सकारात्मक माहौल बना रही है। छात्र इस अभ्यास को उत्साह से अपना रहे हैं और कई छात्र तो अपनी इच्छा से कई-कई कापियों में रामनाम लिखकर प्रिंसिपल को सौंप रहे हैं।

डा. वर्मा ने बताया कि इस प्रक्रिया में लिखने की संख्या को लेकर कोई बाध्यता नहीं है। किसी पर दबाव नहीं डाला गया है, जो जितना चाहे उतना लिख सकता है,” उन्होंने कहा। कुछ कर्मचारियों और तीमारदारों ने भी इसे आत्मिक शांति का साधन बताते हुए रामनाम लिखना शुरू कर दिया है। यह पहल कॉलेज में अनुशासन के साथ-साथ आध्यात्मिकता की सुगंध भी फैला रही है।

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