अम्बेडकरनगर। सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और सड़क सुरक्षा को जन-आंदोलन बनाने की दिशा में शनिवार को जिले में एक अनूठी पहल की गई। जिलाधिकारी श्रीमती ईशा प्रिया के निर्देशन में जिला प्रशासन और आईआईटी मद्रास के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर रोड सेफ्टी के संयुक्त तत्वावधान में करीब आठ हजार महिलाओं को ‘सड़क सुरक्षा सखी’ के रूप में वर्चुअल प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण 7 से 21 जुलाई तक चलने वाले ‘शून्य दुर्घटना दिवस अभियान की पहली प्रमुख गतिविधि रहा।
मुख्य विकास अधिकारी आनंद कुमार शुक्ला ने कहा कि यह अभियान जनभागीदारी पर आधारित है और इसकी सफलता में सड़क सुरक्षा सखियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षित महिलाएं घर-घर जाकर लोगों को यातायात नियमों के पालन और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करेंगी। उन्होंने युवाओं, विद्यार्थियों, महिलाओं और वाहन चालकों से अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की।
आईआईटी मद्रास के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर रोड सेफ्टी के प्रमुख प्रोफेसर वेंकटेश बालासुब्रमण्यम ने कहा कि भारत में सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों में अधिकांश युवा पुरुष होते हैं। ऐसे में महिलाओं के माध्यम से परिवार और समाज में सुरक्षित यातायात व्यवहार विकसित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ‘शून्य दुर्घटना दिवस’ केवल एक अभियान नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जीवनशैली बननी चाहिए।
प्रिंसिपल प्रोजेक्ट ऑफिसर पंकज मेहरा ने प्रशिक्षण के दौरान बताया कि महिलाएं परिवार और समाज में व्यवहार परिवर्तन की सबसे प्रभावी कड़ी हैं। यदि वे सड़क सुरक्षा नियमों का पालन स्वयं करें और दूसरों को प्रेरित करें तो दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
प्रशिक्षण ग्राम पंचायतों और नगर क्षेत्रों में विकेंद्रीकृत व्यवस्था के तहत वर्चुअल माध्यम से आयोजित किया गया। इसमें सड़क सुरक्षा के मूल सिद्धांत, प्रभावी संवाद, जनजागरूकता और व्यवहार परिवर्तन के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई।
कोईईआरएस, आईआईटी मद्रास के हेमेंद्र शर्मा ने बताया कि प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश में पहली बार सड़क दुर्घटनाओं को शून्य करने के उद्देश्य से आठ हजार से अधिक महिलाओं को एक साथ ‘सड़क सुरक्षा सखी’ के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। उन्होंने इसे सड़क सुरक्षा संस्कृति को जन-आंदोलन बनाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया।
7 जुलाई से शुरू होने वाले अभियान के दौरान यही प्रशिक्षित सड़क सुरक्षा सखियां पूरे जिले में घर-घर पहुंचकर लोगों को सड़क सुरक्षा नियमों के पालन के लिए जागरूक करेंगी, जिससे सुरक्षित यातायात संस्कृति को बढ़ावा मिल सके।