मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में दीपोत्सव में 1,71,000 दीप जलाए गए थे। वहीं आज नौवें दीपोत्सव पर केवल अयोध्या धाम में 26 लाख से अधिक दीप प्रज्वलित हो रहे हैं। अगर पूरे प्रदेश भर में गणना की जाए तो 1 करोड़ 51 लाख दीप अकेले दीपोत्सव में जल रहे हैं। 2017 में जब हम लोगो ने पहला दीपोत्सव करने का निर्णय लिया था। इसके पीछे का भाव एक ही था। हजारों वर्ष पहले जब दुनिया अंधकार में जी रही थी तब अयोध्या ने अपने भगवान के लिए, अपनी आस्था के आगमन पर उनके अभिनंदन के लिए दीप प्रज्जवलित किए थे। वह दीपोत्सव व दीपावली एक महापर्व बन गया। उसी दीपोत्सव के कार्यक्रम को जीवंत बनाए रखने के लिए फिर से उस अभियान को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया था। 2017 में यहां प्रज्जवलित करने के लिए हमें पर्याप्त मात्रा में दीप नहीं प्राप्त हुए थे। मुश्किल से 25 हजार दीप ही हमें अयोध्या धाम में मिल पाये थे, हमनें यहां के प्रजापति व कुम्हार समुदाय के लोगो का आवाहन किया तो 51 हजार ही मिल पाये। इसके लिए हमने प्रदेश भर से इकठ्ठा किया था तब जाकर एक लाख 71 दीप जल पाए थे। 2017 में एक लाख 71 हजार आज लाखों लाख दीप अयोध्या धाम में प्रज्जवलित होते है। जो हर भारतवासी के संकल्प के प्रतीक बनते है। यह दीप केवल दीप नहीं है 500 वर्षो के अंधकार पर आस्था के विजय के प्रतीक भी है। 500 वर्षो में किस प्रकार के अपमान को झेलना पड़ा था, किस प्रकार के संघर्ष से हमारे पूर्वज जूझे थे। यह दीप उसी के प्रतीक स्वरुप है। तब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम तम्बू में विराजमान थे, और अब जब दीपोत्सव का नवम संस्करण हो रहा है। जब भगवान राम अपने भव्य और दिव्य मंदिर में विराजमान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के पहले पर्व व त्यौहार आते थे तो लोगो के मन में एक आशंका आती थी। पता नहीं कहां दंगे हो जाए। कहां पर हमारे दुर्गा व लक्ष्मी के पंडालो मे आगजनी की घटनाएं हो जाए। कहां रामलीला में उपद्रव कर दिया जाय। कहां पर गुंडो की फौज आकर वातावरण को खराब कर दे। 2017 के बाद प्रभु राम को हमने अपना आदर्श माना, हम लोगो इस आदर्श को अपने जीवन का मंत्र माना, पूरे दंडकारण्य आश्रमों में जहां भारत के शोध का बेहतरीन केन्द्र, जिन राक्षसों ने उसे वीरान व शमशान बनाने का काम किया था। उन सबके लिए भगवान राम का संकल्प था, वह संकल्प आज भी हमारे जीवन का मंत्र है। भगवान राम ने उस समय राक्षस विहीन व आतंक विहीन करने का संकल्प लिया था। वही हम सबके जीवन का मंत्र बन गया है। प्रदेश के अंदर बिना भेदभाव का लाभ, सुरक्षा सबको, किसी ने पर्व के दौरान राह चलती बेटी या किसी व्यापारी को छेड़ने का प्रयास किया तो जीरो टालरेंस की नीति के तहत सरकार मजबूती के साथ ऐसे तत्वों से निपटने का काम करेगी, यही संकल्प आज भी हम अपने जीवन में लेकर काम कर रहे है। आठ वर्षो में उत्तर प्रदेश गुंडा व माफिया राज से मुक्त है। उत्तर प्रदेश दंगा मुक्त है। यह उत्तर प्रदेश जिसके सामने पहचान का संकट था। आज उत्तर प्रदेश को देश के सामने अपनी पहचान के संकट से मोहताज नहीं होना पड़ता है।
अयोध्या को तब भी उपेक्षित कर दिया गया। 1949 में जब रामभक्तों ने प्रयास किया कि रामलला भी आजादी के साथ विराजमान हो, तो मूर्ति हटाने का आदेश जारी हो गया। फिर कहा गया। मामला शांत करो, लेकिन भक्तों ने कहा कोई मूर्ति को रामजन्मभूमि से हटा नहीं सकता है। एक ही संकल्प था रामलला हम आएंगे मंदिर वहीं बनाएंगे। 1950 से लेकर 1980 तक मंदिर को ताले में बंद किया गया। 1986 तक यह स्थिति बनी रही। रामलला की जन्मभूमि में भगवान को कैद करके रखने का कुत्सित प्रयास हुआ। कौन वह लोग थे, जो आस्था को इस कदर कैद करने का काम कर रहे थे। परन्तु हम सब इस बारें में जानते है, आस्था तब भी झुकी नही। न थकी और न रुकी, भारत की आस्था बिना रुके, बिना झुके निरंतर अपने पथ पर आगे बढ़ती गयी। सत्य ने लिखा और न्याय ने हमारे धर्म स्थापना के लिए मार्ग प्रशस्त किया। आज जब रामलला स्वयं के भव्य मंदिर में विराजमान होते है। कोई भी धर्मावलम्बी नहीं होगा, जिसका मन गौरव से आनंदित न होता हो। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में रामजन्मभूमि मंदिर निर्माण की आधार शिला रखी गयी। मोदी पहले प्रधानमंत्री थे जो अयोध्या आए और रामजन्मभूमि का दर्शन किए। दर्शन करने के साथ राममंदिर की आधारशिला रखी। 22 जनवरी को भगवान राम को विराजमान करके सनातन आस्था को सम्मान देने का काम यिका। भारत की सनातन आस्था को मिला यह सम्मान इन्हीं संकल्पों के दृढ़ अभियान का हिस्सा है। आज जब लाखों दीपक से अयोध्या धाम को जगमगा रहे है। जब हमें विस्मृत नहीं करना चहिए, इसी अयोध्या रामजन्मभूमि आन्दोलन के दौरान कांग्रेस ने न्यायालय में कहा था, भगवान राम मिथक है। उच्चतम न्यायालय में कांग्रेस ने शपथ पत्र दिया था। राम एक काल्पनिक है। सपा ने रामभक्तों पर इसी अयोध्या में गोलियां चलाई थी। यह वही लोग है जो आक्रान्ता की कब्र में जाकर सजदा करते है, लेकिन अयोध्या में राममंदिर में राममंदिर विराजमान होने के कार्यक्रम में निमंत्रण दिया जाता है। तो इस कार्यक्रम को ठुकरा देते है। इनके दोहरे चरित्र को हमें स्मरण रखना होगा।