◆ रामनगरी के हजारा मंदिर में हुई संत मंडल की बैठक
◆ पूरे मामले की निष्पक्ष जांच व एसआईटी की रिपोर्ट आने तक किसी भी निष्कर्ष पर न पहुंचने की किया अपील
अयोध्या। संत मंडल ने रामनगरी के हजारा मंदिर में आयोजित बैठक में चंपतराय का इस्तीफा स्वीकार न किए जाने की बात कही। संतो ने इस दौरान सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने व एसआईटी की रिपोर्ट आने तक किसी निष्कर्ष पर न पहुंचने की अपील की। महंत राघवेश दास दास वेदांती ने कहा कि दान राशि में गड़बड़ी के आरोपों की सच्चाई एसआईटी जांच के बाद ही सामने आएगी। उनकी मांग है कि ट्रस्ट से चंपत राय का इस्तीफा मंजूर न किया जाए।
वेदांती ने कहा कि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे आगे आकर आय-व्यय का पूरा डेबिट-क्रेडिट सार्वजनिक करें। उन्होंने कहा कि यदि लोगों के मन में सवाल हैं तो उनका जवाब भी ट्रस्ट की ओर से दिया जाना चाहिए। वेदांती ने कहा कि चंपत राय ने राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण में वर्षों तक मेहनत की है। उन्होंने कहा कि वह 1993 से अयोध्या में हैं और तब से चंपत राय को काम करते हुए देख रहे हैं। उनका कहना था कि जिन लोगों ने स्वयं निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी की मांग की है, उन्हें बिना जांच पूरी हुए दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने कहा कि दान राशि में चोरी और धन के गलत इस्तेमाल के आरोप गंभीर हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और आगे का फैसला होना चाहिए। बैठक में उपस्थित संतों ने एक स्वर में कहा कि राम जन्मभूमि मंदिर के दान प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। लेकिन जांच पूरी होने से पहले किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं है। संतों ने कहा कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का वर्षों से राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान रहा है, इसलिए उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। संत समाज ने सरकार से एसआईटी की जांच जल्द पूरी कर सत्य को सामने लाने की मांग की, ताकि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो सके और निर्दाेष लोगों की छवि धूमिल न हो। बैठक में महंत शशिकांत दास, महंत राजीव लोचन, महंत वैदेही वल्लभ शरण, सीताराम दास , हरिमोहन शरण , रवि शंकर शरण मौजूद रहे।