अयोध्या। अच्छी आदतें, सकारात्मक सोच, नियमित दिनचर्या और पर्याप्त नींद मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लगातार अच्छे व्यवहार का अभ्यास करने से मस्तिष्क में नए बदलाव आते हैं और व्यक्ति कठिन परिस्थितियों का सामना बेहतर तरीके से करना सीखता है। इसे न्यूरोसाइंस में न्यूरोप्लास्टिसिटी कहा जाता है। यह बातें जिला चिकित्सालय के मनोपरामर्शदाता डॉ. आलोक मनदर्शन ने डोगरा रेजिमेंट के अवध ऑडिटोरियम में आयोजित सैन्य परिवार मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता सत्र में कहीं।
मिलिट्री हॉस्पिटल अयोध्या कैंट के संयोजन में आयोजित इस कार्यक्रम में सैन्य अधिकारियों, सैनिकों और उनके परिवारों ने भाग लिया। सत्र में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं, उनके लक्षणों और बचाव के उपायों की जानकारी दी गई।
डॉ. आलोक मनदर्शन ने बताया कि अच्छेव्यवहारकानियमितअभ्यासमस्तिष्ककोसकारात्मकआदतेंअपनानेमेंमददकरताहै। संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा (सीबीटी) में भी नकारात्मक सोच और अस्वस्थ व्यवहार को पहचानकर उनकी जगह स्वस्थ सोच और व्यवहार विकसित करने पर जोर दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि सेरोटोनिन और डोपामिन जैसे मस्तिष्क के रसायन मनोदशा, प्रेरणा और खुशी से जुड़े होते हैं। एंडोर्फिन दर्द से राहत देने में मदद करता है, जबकि ऑक्सीटोसिन सामाजिक जुड़ाव और विश्वास से संबंधित है। इन प्रक्रियाओं के साथ नियमित व्यायाम, संतुलित दिनचर्या और पर्याप्त नींद मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक हैं।
उन्होंने बताया कि नींद की कमी और लगातार तनाव से चिड़चिड़ापन, बेचैनी, उदासी तथा निर्णय लेने में परेशानी बढ़ सकती है। इसलिए तनाव को पहचानना, समय पर आराम करना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना जरूरी है। तनाव का सकारात्मक तरीके से सामना करने पर व्यक्ति चुनौतियों को प्रेरणा में बदल सकता है।
कार्यक्रम में सैन्य कर्मियों और उनके परिजनों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी शंकाओं का समाधान किया गया। साथ ही उन्हें अच्छी नींद की आदतों, स्वस्थ दिनचर्या और मानसिक परेशानियों के शुरुआती संकेतों को पहचानने के प्रति जागरूक किया गया।