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जिला अस्पताल में तीन महीनों से बंद निजी मेडिकोलीगल, नियमों के कड़े होने के बाद इस पर लग गयी है लगाम

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अयोध्या। जिला अस्पताल में पिछले तीन महीनों से एक भी प्राइवेट (निजी) मेडिकोलीगल नहीं किया गया है। प्राइवेट रिपोर्टों के दुरुपयोग और फर्जी तरीके से तैयार कराए जाने के मामलों के सामने आने के बाद प्रशासन ने नियम कड़े कर दिए थे। इसके परिणामस्वरूप लोग अब निजी मेडिकोलीगल कराने से बच रहे हैं।

चोट लगने की स्थिति में पुलिस घायल को अस्पताल लाकर चिकित्सकीय परीक्षण कराती है, जिसके आधार पर मुकदमे की धाराएं तय होती हैं। लेकिन ऐसे मामलों में जहां पुलिस सुनवाई नहीं करती या प्राथमिकी दर्ज नहीं होती, पीड़ित निजी मेडिकोलीगल का विकल्प चुनते थे। यह रिपोर्ट स्वयं के पास रहती थी और कानूनी प्रयोजनों हेतु प्रयोग में लाई जाती थी।

हालांकि कुछ समय पहले निजी मेडिकोलीगल का दुरुपयोग कर विवादित या झूठे मामलों में प्रमाण तैयार कराने की घटनाएं सामने आईं। यहां तक कि जिला अस्पताल से फर्जी निजी मेडिकल रिपोर्ट बनाए जाने का एक वीडियो भी वायरल हुआ था। इसके बाद प्रशासन ने नियमों में बदलाब करते हुए ऐसे मामलों पर निगरानी बढ़ा दी।


मारपीट के मामलों पर सख्ती, एक्सीडेंट रिपोर्ट यथावत


नई व्यवस्था के तहत सड़क दुर्घटना से जुड़े मामलों में निजी मेडिकोलीगल की प्रक्रिया पहले की तरह जारी है। लेकिन मारपीट से जुड़े मामलों में नई पाबंदियां लागू की गई हैं। अब निजी मेडिकोलीगल रिपोर्ट की एक प्रति संबंधित थाना पुलिस को अनिवार्य रूप से भेजी जाएगी। इससे घायल व्यक्ति को पुलिस और कानूनी प्रक्रिया से जुड़े आगे के कदम उठाने होंगे। इस नियम के प्रभाव में आने के बाद लोग झूठे मुकदमे या विरोधियों को फंसाने की नीयत से निजी रिपोर्ट बनवाने से परहेज कर रहे हैं।

जिला अस्पताल अधीक्षक डॉ. अजय चौधरी ने बताया कि एक्सीडेंट के मामले में पहले जैसी प्रक्रिया जारी है, लेकिन मारपीट से जुड़े मामलों में अब अनुमति के बाद ही निजी मेडिकोलीगल किया जाएगा।

वहीं प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश सिंह ने कहा किप्रत्येक निजी मेडिकोलीगल में अब चिकित्सक के साथ फार्मासिस्ट के हस्ताक्षर भी अनिवार्य किए गए हैं, ताकि प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी बन सके।

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