अयोध्या। रामायण काल से जुड़े प्राचीन तीर्थ स्थलों के संरक्षण और विकास को लेकर व्यापक योजना पर काम शुरू हो गया है। इसके तहत 84 कोसी परिक्रमा क्षेत्र में स्थित अयोध्या, गोंडा, बस्ती और अंबेडकरनगर जिलों के कुल 41 पौराणिक स्थलों को चिह्नित कर उनके कायाकल्प की तैयारी की जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन स्थलों का सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है और अब मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है, जिसके आधार पर कार्य आगे बढ़ाया जाएगा। योजना के तहत तीर्थ स्थलों के मूल स्वरूप को संरक्षित रखते हुए आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन में सहूलियत मिल सके।
मुख्य विकास अधिकारी कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि प्रस्तावित कार्यों में कुंडों का सौंदर्यीकरण, शेड, चेंजिंग रूम, प्रकाश व्यवस्था और अन्य आधारभूत सुविधाएं शामिल हैं। इसके साथ ही तीर्थ स्थलों तक पहुंचने वाले मार्गों को भी सुदृढ़ किया जाएगा। पहले चरण में 14 प्रमुख कुंडों का विकास मनरेगा के माध्यम से कराया जा रहा है, जबकि अन्य कार्य संबंधित विभागों के माध्यम से प्रस्तावित हैं।
योजना में अंगी ऋषि आश्रम, वाल्मीकि आश्रम, विल्यहरि, त्रिपुरारी, पुण्यहरि, हनुमान कुंड दराबगंज, विभीषण कुंड, सुग्रीव कुंड, राम कुंड, सीता कुंड, दुग्धेश्वर कुंड, भैरव कुंड, तमसा नदी, प्रमोद वन लखनीपुर, श्रवण क्षेत्र बारुन, पाराशर आश्रम देवराकोट, व्यवन आश्रम कुंदुर्खाकला, गौतम आश्रम रुदौली, मानस तीर्थ, पिशाच मोचन, गया कुंड भरत कुंड, भरत कुंड, नंदीग्राम, कालिका देवी नंदीग्राम, जटा कुंड, शत्रुघ्न कुंड, अजित आश्रम, आस्तीक आश्रम आस्तीकन, रमणक स्थान पंडितपुर, घृताची कुंड और थरेरू जैसे महत्वपूर्ण स्थल शामिल हैं।
परियोजना के तहत प्रत्येक स्थल के लिए अलग-अलग विकास योजना तैयार की जा रही है। इसमें घाट निर्माण, बाउंड्री वॉल, हरित क्षेत्र विकास और सुरक्षा व्यवस्था को शामिल किया गया है। साथ ही, प्रकाश व्यवस्था और सीसीटीवी निगरानी जैसी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
इस पहल के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित तीर्थ स्थलों के विकसित होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, 84 कोसी परिक्रमा मार्ग के विकसित होने से श्रद्धालुओं को एक साथ कई स्थलों के दर्शन की सुविधा मिल सकेगी।