अयोध्या। जनपद न्यायालय परिसर में शनिवार को वृहद राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारम्भ जनपद न्यायाधीश रणंजयकुमारवर्मा ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इस अवसर पर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी रविकांत, वाणिज्यिक न्यायालय के पीठासीन अधिकारी वेदप्रकाशवर्मा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरेन्द्रमोहनसहाय, विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट राकेशकुमार, पाक्सो एक्ट की विशेष न्यायाधीश निरूपमाविक्रम, विशेष न्यायालय के न्यायाधीश रजतवर्मा, नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत दीपकयादव, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधांशुशेखरउपाध्याय सहित अनेक न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर जनपद न्यायाधीश रणंजय कुमार वर्मा ने कहा कि लोक अदालत की मूल भावना लोक कल्याण है। इसमें आपसी सुलह-समझौते के माध्यम से दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए विवादों का समाधान कराया जाता है। उन्होंने कहा कि समाज में सौहार्द और प्रेम की भावना बनाए रखने के लिए आपसी मतभेदों को बातचीत से समाप्त करने का प्रयास किया जाना चाहिए।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव रंजिनीशुक्ला ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य लोगों को सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि सुलह-समझौते के माध्यम से वादकारियों के समय और धन दोनों की बचत होती है। लोक अदालत में आने वाले पक्षकारों के लिए बैठने और पेयजल सहित अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की गई थी।
नोडल अधिकारी दीपक यादव और सचिव रंजिनी शुक्ला के अनुसार आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 81,803 वादोंकानिस्तारण किया गया तथा लगभग 18 करोड़ 23 लाख 50 हजाररुपये की समझौता राशि तय हुई। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में 115 मामलों का निस्तारण कर करीब 10 करोड़ 14 लाखरुपये की क्षतिपूर्ति निर्धारित की गई। इसके अलावा बैंक ऋण वसूली, पारिवारिक विवाद, वाणिज्यिक और राजस्व मामलों सहित विभिन्न श्रेणियों के वादों का भी निस्तारण किया गया।