Friday, March 6, 2026
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निर्मला हॉस्पिटल प्रकरण: परिजनों ने की गैरइरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग


अयोध्या। निर्मला हॉस्पिटल में महिला की मौत के मामले को लेकर विवाद और गहराता जा रहा है। मृतका के परिजनों ने सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता में अस्पताल प्रबंधन, संबंधित डॉक्टर व नर्स तथा सोना हॉस्पिटल के चिकित्सक पर गैरइरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की। परिजनों ने प्रकरण को मेडिकोलीगल केस घोषित करने, अस्पताल को सील करने, सीसीटीवी फुटेज जब्त करने और परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग भी रखी।



परिजनों की ओर से प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेता शरद शुक्ला ने कहा कि महिला की मौत इंजेक्शन के ओवरडोज के कारण हुई। उन्होंने दावा किया कि रेफर करते समय चिकित्सक द्वारा ओवरडोज स्वीकार करने संबंधी नोट स्वयं लिखा गया था। अस्पताल प्रबंधन का यह कहना कि नोट परिजनों के दबाव में लिखा गया, तथ्यहीन और भ्रामक है। शरद शुक्ला ने सवाल उठाया कि तीन से चार संख्या वाला परिवार, अस्पताल के 40 कर्मचारियों के बीच किसी डॉक्टर पर ऐसा दबाव कैसे बना सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान जिस प्रकार ध्वजारोहण के समय अस्पताल के चिकित्सक के सामने हर्ष फायरिंग की वीडियो सामने आ रही हैं, उससे यह स्पष्ट होता है कि दबंग कौन है और दबाव किस स्तर पर बनाया जाता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल की लापरवाही के चलते महिला को इंजेक्शन का ओवरडोज दिया गया, जिसके दुष्प्रभाव से उसके कई आंतरिक अंगों ने काम करना बंद कर दिया और अंततः उसकी मौत हो गई। शरद शुक्ला ने अस्पताल प्रबंधन और संबंधित डॉक्टरों को संवेदनहीन बताते हुए कहा कि घटना के बाद लगातार बयानबाजी करना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।

उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस की मौजूदगी में अस्पताल के डॉक्टर द्वारा ओवरडोज दिए जाने की बात स्वीकार करने का वीडियो सोशल मीडिया पर उपलब्ध है। उनके अनुसार, इससे यह स्पष्ट होता है कि घटना के संबंध में तथ्य दबाने का प्रयास किया जा रहा है। शरद शुक्ला ने आरोप लगाया कि इंजेक्शन की अधिक मात्रा के दुष्प्रभाव से मृतका के कई आंतरिक अंगों ने काम करना बंद कर दिया, जिससे उसकी मौत हुई।


डेथ बुक में जिन बीमारियों का उल्लेख है, वे स्वयं बीमारी नहीं बल्कि इंजेक्शन ओवरडोज के कारण उत्पन्न हुई स्थितियां


शरद शुक्ला ने कहा कि डेथ बुक में जिन बीमारियों का उल्लेख है, वे स्वयं बीमारी नहीं बल्कि इंजेक्शन ओवरडोज के कारण उत्पन्न हुई स्थितियां हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आईएमए द्वारा डेथ बुक के आधार पर ओवरडोज से इनकार करना भ्रामक प्रस्तुति है। आईएमए की प्रेस वार्ता में दिए गए उस बयान पर भी उन्होंने आपत्ति जताई, जिसमें कहा गया था कि संबंधित इंजेक्शन की ओवरडोज से मौत नहीं होती।

मृतका के बेटे सुशील कौशल ने दबाव में नोट लिखवाए जाने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि रेफर करते समय उपचार का विवरण लिखकर देने का अनुरोध किया गया था, ताकि आगे इलाज संभव हो सके। चिकित्सक ने यह विवरण स्वेच्छा से लिखा और इसके बाद अस्पताल का शेष भुगतान भी किया गया।
दबाव और गुंडई के आरोपों पर परिजनों ने कहा कि पुलिस और अस्पताल स्टाफ की मौजूदगी में ऐसे आरोप निराधार हैं।


भावुक हुए बेटे के सवाल



प्रेस वार्ता के दौरान मृतका के बेटे सुशील कौशल भावुक हो गए। उन्होंने निर्मला और सोना हॉस्पिटल के प्रबंधन तथा आईएमए द्वारा लगाए गए आरोपों को निंदनीय बताया। सुशील ने कहा कि उनका परिवार केवल न्याय की मांग कर रहा है, लेकिन अब तक न्याय नहीं मिला। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कुछ लोग अस्पताल पहुंच जाएं तो क्या उन्हें डराकर मनमानी बात लिखवाई जा सकती है।
उन्होंने कहा, “डॉक्टर साहब बताइए, आपको कितना पैसा चाहिए, लेकिन हमारी मां को लौटाकर दिखाइए।” सुशील ने डॉक्टरों के रवैये को असंवेदनशील बताते हुए कहा कि कम से कम उन्हें पीड़ित परिवार से मिलकर बात करनी चाहिए थी। उन्होंने आईएमए की प्रेस वार्ता में प्रयुक्त भाषा को भी आपत्तिजनक और पीड़ादायक बताया।



 

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