अम्बेडकर नगर। सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को दरकिनार कर कुछ जिम्मेदार अधिकारी आज भी अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत करने के बावजूद ग्राम पंचायत मौरापारा के एक मामले में शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसे न्याय नहीं मिल पाया, उल्टा गलत आख्या लगाकर प्रकरण का निस्तारण कर दिया गया। मामला विकास खंड कटेहरी अंतर्गत ग्राम मौरापारा का है, जहां की निवासी सुधा हरिकांत तिवारी पत्नी हरिकांत ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शौचालय निर्माण के लिए शिकायत दर्ज की थी। लेकिन ग्राम पंचायत अधिकारी मनीष यादव द्वारा की गई आख्या में दर्शाया गया कि शिकायतकर्ता के पास पूर्व से ही शौचालय बना हुआ है, इस आधार पर उन्हें अपात्र घोषित कर दिया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिस शौचालय की बात कही जा रही है, वह उनके बड़े भाई के नाम पर है, जो उनसे अलग रहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके स्वयं के आवास पर आज तक कोई शौचालय बना ही नहीं है। आश्चर्य की बात यह है कि सचिव द्वारा रिपोर्ट में कुछ स्थानीय लोगों के नाम गवाह के रूप में दर्शाए गए हैं। जब उन लोगों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट इंकार करते हुए कहा कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है, न उन्होंने कोई गवाही दी है, न ही कोई हस्ताक्षर किए हैं। अब सवाल उठता है कि जब शिकायतकर्ता से कोई संपर्क ही नहीं किया गया, तो बिना साक्ष्य और बिना गवाही के गलत तरीके से रिपोर्ट कैसे लगा दी गई? शिकायतकर्ता ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए गलत आख्या लगाने वाले अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। उधर, जब इस संबंध में खंड विकास अधिकारी, कटेहरी से जानकारी ली गई, तो उन्होंने बताया कि प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एडीओ पंचायत को पुनः जांच कराए जाने का निर्देश दिया गया है।