अम्बेडकर नगर। रमाबाई राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय अकबरपुर में शुक्रवार को विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और मौन श्रद्धांजलि के साथ हुआ। महाविद्यालय के संरक्षक एवं प्राचार्य प्रो. अरविंद कुमार वर्मा के निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य वर्ष 1947 में भारत विभाजन के दौरान विस्थापित हुए लाखों लोगों की पीड़ा, संघर्ष और बलिदान को स्मरण करना तथा युवा पीढ़ी को उस त्रासद इतिहास से परिचित कराना रहा।
कार्यक्रम में छात्राओं ने भाषण, कविता-पाठ, पोस्टर प्रदर्शनी और विचार-विमर्श के माध्यम से विभाजन की घटनाओं और उससे उपजी मानवीय त्रासदी को सामने रखा। मुख्य वक्ता डॉ. रवीन्द्र कुमार वर्मा ने कहा कि भारत का विभाजन केवल सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि लाखों परिवारों के घर, रिश्ते, संपत्ति और जीवनभर की स्मृतियों के बिखरने की त्रासदी भी थी। सांप्रदायिक हिंसा और बड़े पैमाने पर हुए पलायन ने मानवता को गहरा आघात पहुंचाया, जिसकी पीड़ा पीढ़ियों तक महसूस की गई।
वक्ताओं ने कहा कि विभाजन की स्मृतियों को याद करने का उद्देश्य किसी धर्म या समुदाय के प्रति घृणा पैदा करना नहीं, बल्कि अतीत से सीख लेकर भविष्य में ऐसी त्रासदी की पुनरावृत्ति रोकना है। सांप्रदायिक सद्भाव, आपसी सहयोग और मानवीय संवेदना ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति हैं। कार्यक्रम में विस्थापित परिवारों के संघर्ष तथा कठिन परिस्थितियों में एक-दूसरे की सहायता करने वाले लोगों के मानवीय प्रयासों पर भी प्रकाश डाला गया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य प्रो. अरविंद कुमार वर्मा ने कहा कि विभाजन की पीड़ा मानवता के लिए गंभीर चेतावनी है। इतिहास के दुखद अध्यायों को स्मरण करते हुए हमें ऐसा भारत बनाने का संकल्प लेना चाहिए, जहां प्रेम, सहयोग और मानवता सर्वोपरि हो। इस दौरान छात्राओं और प्राध्यापकों ने राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता, सामाजिक सद्भाव, शांति और मानवता की रक्षा का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक, कर्मचारी और छात्राएं मौजूद रहीं।