◆ बर्न-आउट सिंड्रोम है आत्मघाती मनोदशा, मनोपरामर्श दूर करता है डिस्ट्रेस व हताशा
अयोध्या। जिला चिकित्सालय के मनोपरामर्शदाता डा आलोक मनदर्शन ने बताया कि वर्क-स्ट्रेस का प्रबन्धन न कर पाने पर स्ट्रेस नकारात्मक रूप ले कर डिस्ट्रेस या अवसाद बन सकता है जिसमे उलझन, बेचैनी, घबराहट, अनिद्रा व आत्मघाती मनोदशा के साथ शारीरिक दुष्प्रभाव भी दिखाई पड़ते हैं। तीव्र मेन्टल स्ट्रेस से कार्टिसाल व एड्रेननिल हॉर्मोन बढ़ जाता है, जिससे चिंता, घबराहट, आलस्य,अनमनापन,अनिद्रा,सरदर्द,पेट दर्द,तेज़ धड़कन, चिड़चिड़ापन,गुस्सा व नशे की स्थिति भी पैदा हो सकती है । स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसाल का लेवल लम्बे समय बढ़े रहने पर इन्सुलिन रेजिस्टेंस बढ़ कर डायबिटीज का कारण तथा एड्रेनलिन बढे रहने के रक्तवाहिनियो में सिकुड़न के कारण हाई ब्लड प्रेशर की दशा बन सकती है।
मनो परामर्शदाता, जिला चिकित्सालय अयोध्या
