◆ मामले में कोर्ट सख्त, सीओ से तीन दिन में मांगा जवाब
अयोध्या। पुलिस विवेचना में गंभीर लापरवाही का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। बाबाबाजार थाना क्षेत्र के एक प्रकरण में विवेचना के दौरान ऐसे व्यक्ति का बयान दर्ज कर लिया गया, जिसकी मृत्यु कथित तौर पर बयान दर्ज होने से करीब छह माह पहले ही हो चुकी थी। मामले का खुलासा होने पर विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट की अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए तत्कालीन क्षेत्राधिकारी रुदौली से तीन दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है।
मामला बाबाबाजार थाना क्षेत्र के इमिलिहा गांव निवासी प्रेम कुमार रावत की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि गांव के कुछ लोगों ने उनकी भूमि पर कब्जे की नीयत से घर में घुसकर तोड़फोड़ की, महिलाओं के साथ अभद्रता की, जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया तथा जान से मारने की धमकी दी। न्यायालय के निर्देश पर मामले की जांच तत्कालीन क्षेत्राधिकारी रुदौली को सौंपी गई थी।
जांच अधिकारी की ओर से अदालत में प्रस्तुत रिपोर्ट में तीन गवाहों के बयान दर्ज होने का उल्लेख किया गया। हालांकि पीड़ित ने शपथपत्र के माध्यम से न्यायालय को अवगत कराया कि रिपोर्ट में जिस जगजीत बहादुर सिंह को प्रमुख गवाह बताया गया है, उनका निधन कथित बयान दर्ज किए जाने से लगभग छह माह पूर्व ही हो चुका था। इस तथ्य के सामने आने के बाद जांच रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
विशेष न्यायाधीश दीपक यादव ने प्रथम दृष्टया इसे गंभीर लापरवाही और संभावित फर्जीवाड़ा मानते हुए तत्कालीन क्षेत्राधिकारी को नोटिस जारी किया है। अदालत ने निर्देश दिया है कि तीन दिन के भीतर यह स्पष्ट किया जाए कि मृत व्यक्ति का बयान किस आधार पर और किस परिस्थिति में दर्ज किया गया। साथ ही संबंधित अभिलेख भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 20 जून निर्धारित की है। अब इस प्रकरण में पुलिस अधिकारियों के स्पष्टीकरण और न्यायालय की अगली कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।