◆ बड़े ऑर्डर मिलने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े, इलेक्ट्रिक चाक से उत्पादन में आई तेजी
अयोध्या। अयोध्या में दीपोत्सव की तैयारियों के बीच मिट्टी के दीये बनाने वाले कुम्हार परिवारों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। दीपोत्सव के लिए बड़े पैमाने पर दीयों की मांग से स्थानीय कारीगरों को ऑर्डर मिल रहे हैं। इससे पारंपरिक मिट्टी कला से जुड़े परिवारों की आजीविका को सहारा मिल रहा है। दीये बनाने के काम में युवा भी भागीदारी कर रहे हैं और अपने गांव में रहकर रोजगार प्राप्त कर रहे हैं।
बड़े ऑर्डर से बढ़ी कुम्हार परिवारों की आमदनी
जयसिंहपुर गांव के बृज किशोर प्रजापति बताते हैं कि दीपोत्सव शुरू होने के बाद से उनका पूरा परिवार दीये बनाने के काम में जुटा है। इस बार उन्हें एक लाख दीपों का ऑर्डर मिला था, जिसे समय से तैयार कर पहुंचा दिया गया। गांव के ही राजेश प्रजापति को दो लाख दीप बनाने का ऑर्डर मिला। उनके परिवार के सदस्य भी इस काम में सहयोग करते हैं।
राजेश प्रजापति के अनुसार, पहले पूरे महीने में मुश्किल से 20 से 25 हजार रुपये की कमाई हो पाती थी, जबकि दीपोत्सव के दौरान बड़े ऑर्डर मिलने से लाखों रुपये की आमदनी का अवसर मिलता है। इससे परिवार के सदस्यों को स्थानीय स्तर पर काम मिल रहा है और युवा पारंपरिक हुनर को आजीविका का माध्यम बना रहे हैं।
इलेक्ट्रिक चाक से उत्पादन में तेजी
कुम्हार परिवारों को इलेक्ट्रिक चाक उपलब्ध कराए जाने से दीये बनाने के काम में तेजी आई है। आधुनिक उपकरणों के उपयोग से उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता में सुधार हुआ है। जयसिंहपुर, विद्याकुंड और सोहावल क्षेत्र के ड्योढ़ी गांव सहित कई स्थानों पर कुम्हार परिवार दीपोत्सव के लिए दीये तैयार करने में जुटे हैं। घरों में मिट्टी तैयार करने, दीये बनाने और उन्हें सुखाने का काम लगातार चल रहा है।
दीपोत्सव के लिए मिट्टी के दीयों की मांग बढ़ने से स्थानीय कारीगरों को अपने पारंपरिक व्यवसाय का विस्तार करने का अवसर मिल रहा है। इससे मिट्टी कला को आगे बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं।
राम की पैड़ी पर 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित करने का लक्ष्य
दसवें दीपोत्सव के अवसर पर 7 नवंबर को राम की पैड़ी पर 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। आयोजन की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, क्वीन हो मेमोरियल पार्क में 17.64 लाख दीप घाट स्थित गोदाम में पहुंचाए जा चुके हैं।
दीपोत्सव की व्यवस्थाओं में अवध विश्वविद्यालय के छात्र, अधिकारी और स्वयंसेवी संगठन भी सहयोग कर रहे हैं। आयोजन के लिए करीब 35 हजार स्वयंसेवकों को लगाया गया है।
पारंपरिक हुनर को मिल रहा नया अवसर
अयोध्या का दीपोत्सव कुम्हार परिवारों के लिए पारंपरिक कला को रोजगार से जोड़ने का अवसर बन रहा है। बड़े ऑर्डर, आधुनिक उपकरणों और स्थानीय स्तर पर बढ़ती मांग से कारीगरों को अपने काम को आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है। दीपोत्सव के माध्यम से मिट्टी के दीये बनाने की परंपरा को नई पहचान मिलने के साथ स्थानीय कारीगरों की भागीदारी भी बढ़ रही है।