Tuesday, November 3, 2026
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बलिदानी कारसेवकों के त्याग और संघर्ष को अयोध्या ने किया नमन, दिगंबर अखाड़े में हुई श्रद्धांजलि सभा


◆ 30 अक्टूबर और 2 नवंबर 1990 के गोलीकांड में बलिदान हुए कारसेवकों को संतों, जनप्रतिनिधियों और रामभक्तों ने दी श्रद्धांजलि


अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के इतिहास में दर्ज 30 अक्टूबर और 2 नवंबर 1990 के गोलीकांड में बलिदान हुए कारसेवकों की स्मृति में सोमवार को अयोध्या में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। शहीद मार्ग स्थित दिगंबर अखाड़ा परिसर में हुतात्मा कारसेवक स्मारक समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम में संत-महंतों, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में रामभक्तों ने पुष्पांजलि अर्पित कर बलिदानियों को नमन किया। इस दौरान जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा परिसर गूंजता रहा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास ने की। विभिन्न संस्कृत विद्यालयों के विद्यार्थियों ने भी पुष्पांजलि अर्पित कर कारसेवकों के बलिदान को याद किया।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की धार्मिक समिति के सदस्य महंत राजकुमार दास ने कहा कि शायर की पंक्तियां ‘शहीदों की मजारों पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा’ बलिदानियों की स्मृति को जीवंत करती हैं। श्रीराम जन्मभूमि की मुक्ति के लिए चले आंदोलन में अनेक रामभक्तों ने अपने प्राणों की आहुति दी। आज भव्य-दिव्य राम मंदिर का निर्माण उन्हीं के संघर्ष और बलिदान का परिणाम है। उन्होंने कहा कि 500 वर्षों से चला आ रहा विवाद सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से समाप्त हुआ और सनातन धर्मावलंबियों की आस्था को नई पहचान मिली। बलिदानी कारसेवकों को जितना नमन किया जाए, कम है।

विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज ने वर्ष 1990 के गोलीकांड का उल्लेख करते हुए कहा कि संतों के आह्वान पर गांव-गांव से लाखों रामभक्त अयोध्या पहुंचे थे। हनुमानगढ़ी और शहीद मार्ग पर हुई गोलीबारी श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन का सबसे काला अध्याय है। कारसेवकों ने अपने प्राणों की आहुति देकर आंदोलन को नई दिशा दी, जिसका परिणाम आज भव्य राम मंदिर के रूप में सामने है।

महापौर गिरीशपति त्रिपाठी ने कहा कि हुतात्मा कारसेवकों का बलिदान अयोध्या के इतिहास का अविस्मरणीय अध्याय है। उनके त्याग और संघर्ष के कारण ही आज अयोध्या विश्व की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर रही है। इन बलिदानियों की स्मृतियों को संरक्षित रखना हम सभी का दायित्व है।

सभा में उपस्थित संत-महंतों ने कहा कि 1990 के गोलीकांड में बलिदान हुए कारसेवकों का त्याग आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। हुतात्मा कारसेवक स्मारक समिति उनकी स्मृतियों को संजोने और उनके संघर्ष की गाथा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

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