◆ मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित
अयोध्या। जिला अस्पताल में एक मरीज के हाथ-पैर बांधकर किए गए इलाज की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। वायरल फोटो में मरीज के पास खाना रखा दिखाई दे रहा था। मामले ने गंभीर रूप ले लिया तो अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. बृजेश चौहान ने जिला अस्पताल पहुंचकर जांच की।
जानकारी के मुताबिक, बीकापुर के सराय धनौली निवासी 45 वर्षीय सालिगराम को पेट दर्द और शुगर की समस्या के चलते कुछ दिन पहले जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बताया गया कि इलाज के दौरान वह मानसिक रूप से अस्थिर और स्टाफ के प्रति आक्रामक व्यवहार कर रहा था, जिसके चलते किसी कर्मचारी ने सुरक्षा के मद्देनजर उसके हाथ-पैर बांध दिए।
बाद में उसकी स्थिति बिगड़ने पर डॉक्टरों ने उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। परिजनों ने वहां से मरीज को स्वेच्छा से डिस्चार्ज कराकर लखनऊ ले जाने का निर्णय लिया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
मरीज के भाई जगतराम ने बताया कि वे दिल्ली में थे। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर देखकर उन्हें पूरे मामले की जानकारी मिली। अस्पताल पहुंचने पर पता चला कि सालिगराम को पहले जिला अस्पताल में भर्ती किया गया था, फिर मेडिकल कॉलेज भेजा गया और वहां से परिवार उसे लेकर निकला था।
इस बीच एसआईसी डॉ. राजेश सिंह ने घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी है। वहीं, मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर प्रभारी डॉ. विनोद आर्या ने बताया कि मरीज को अर्धविक्षिप्त अवस्था में लाया गया था। पेट में चोट और शुगर के उतार–चढ़ाव की समस्या थी। बाद में परिजन स्वयं उसे लखनऊ ले गए। मामले ने जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारी जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की बात कह रहे हैं।