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कविता पुस्तक ‘धर्म के भाव उंचे है’ पर एक बातचीत का हुआ आयोजन

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अयोध्या। जनवादी लेखक संघ की घर-गोष्ठी शृंखला के अन्तर्गत कवि-लेखक और चिंतक आर.डी. आनन्द के घर पर उनकी कविता-पुस्तक ‘धर्म के भाव ऊँचे हैं’ पर एक बातचीत का आयोजन किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि-लेखक स्वप्निल श्रीवास्तव ने कहा कि अच्छी रचनाएँ अक्सर कठिनाई और संघर्ष के दिनों में लिखी जाती हैं।
कवि-प्राध्यापक डॉ. विशाल श्रीवास्तव ने कहा कि इस संग्रह में कल्पना-तत्व से नहीं बल्कि विचार-तत्व से बुनी हुई कविताएं हैं। इन कविताओं के आधार के रूप में वैचारिक प्रतिबद्धता है और अधिरचना के रूप में जीवनानुभव, पर्यवेक्षण और द्वन्द्व उपस्थित है। कवि आर.डी. आनन्द ने इस अवसर पर अपनी पुस्तक से कई कविताओं का पाठ किया। उन्होंने अपनी रचना-प्रक्रिया के बारे में बात करते हुए कहा कि ये कविताएँ अस्पताल के बिस्तर पर लिखी गयी हैं। उस समय मनःस्थिति में कई सारे दृश्य गतिमान रहते थे, मैंने उन चलचित्रों को लिपिबद्ध कर दिया था।
वरिष्ठ आलोचक रघुवंशमणि ने कहा कि बहुत सी महान कृतियाँ लेखकों-कवियों ने व्याधि की स्थिति में लिखी हैं, उदाहरण के लिए टी.एस. इलियट का वेस्टलैण्ड बुखार में लिखा गया है। जब हम सामान्य से भिन्न स्थिति होते हैं तो अभिव्यक्ति भी अलग तरह की होती है। इन कविताओं में कविता का सामान्य या प्रचलित शिल्प अथवा अनुशासन नहीं है, प्राचीन काव्यशास्त्र के दृष्टिकोण से देखें तो इसमें कुछ वक्रोक्ति जैसी चीज़ें दिखाई दे सकती हैं। सत्यभान सिंह जनवादी ने कहा कि आज की चर्चा अत्यंत महत्वपूर्ण रही। उन्होंने कहा कि आर.डी.आनन्द जी किसी भी परिस्थिति में निराश नहीं होते और उनके अंदर अदम्य जिजीविषा है। किसी भी स्थिति में उनका रचनाकार अपनी वैचारिकता और प्रतिबद्धता से विचलित नहीं होता। उनका यह संग्रह जो बीमारी के दौरान लिखा गया है, इस बात का साक्षात प्रमाण है। विनीता कुशवाहा ने आर.डी.आनन्द की रचनाधर्मिता की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे पूरी दृढ़ता के साथ अपने जीवन और विचार में प्रगतिशील मूल्यों के साथ खड़े दिखाई देते हैं। वे अत्यंत ऊर्जावान हैं और उनके लिखे में यह तत्व दृष्टिगत होता है। डॉ. नीरज सिन्हा ‘नीर’ ने भी आर. डी. आनंद की कविताओं में व्यंग्य की ताकत को रेखांकित करते हुए कहा कि अपने समय के यथार्थ को ऐसी भाषा में सहज रूप से अभिव्यक्त करना ही उनका कविकौशल है। पूजा श्रीवास्तव ने कहा कि आर.डी.आनंद अपनी कृति में सत्ता की ताकत और उसके खेल को बेनकाब करते हैं। इस संग्रह में उनकी भाषा और शिल्प का जो कलेवर है, वह अत्यंत सराहनीय है। बृजेश श्रीवास्तव ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी लेखन के प्रति एकाग्रता बनाए रखना इस बात का प्रमाण है कि रचनाकार का विचार ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। चिंतनपद्धति की शक्ति से ही उनके भीतर एक सकारात्मक ऊर्जा का विस्तार हुआ है, जिसके कारण वे यह पुस्तक लिखने में समर्थ हो पाए हैं। के के पाण्डेय ने कहा कि जिस स्थिति में लोग जीवन जीने की आशा छोड़ देते हैं, ऐसी स्थिति में आर.डी.आनन्द ने एक कृति की रचना की, यह बड़ी महत्वपूर्ण बात है। इस अवसर पर आर.डी. आनन्द के परिवार के सदस्य एवं साहित्यसुधी उपस्थित रहे।

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