◆ डीएम ने तालाब, पशुचर और चकमार्ग की जमीन को कब्जामुक्त कराने के दिए निर्देश
अयोध्या। जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी की अध्यक्षता में सोमवार को तहसील सोहावल में संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. गौरव ग्रोवर की मौजूदगी में अधिकारियों ने फरियादियों की शिकायतें सुनीं। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को शिकायतों का निर्धारित समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
संपूर्ण समाधान दिवस में भूमि विवाद, राजस्व, खड़ंजा, नाली, विद्युत, पेयजल, स्वास्थ्य और पुलिस से संबंधित शिकायतें सामने आईं। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को प्रकरणों की गंभीरता से जांच करने और आवश्यकता के अनुसार मौके पर जाकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
पिलखावा थाना रौनाही निवासी ने तालाब की भूमि पर अवैध मकान बनाए जाने की शिकायत की। डीएम ने एसडीएम सोहावल और एसएचओ रौनाही को जांच कर अवैध कब्जा हटवाने तथा संबंधित व्यक्ति का उत्तरदायित्व निर्धारित करने के निर्देश दिए। पूरे नवी सिंह विशुनपुरसारा निवासी की चकमार्ग को अतिक्रमणमुक्त कराने की शिकायत पर एसडीएम और संबंधित बीडीओ को कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
बाबा का पुरवा निवासी धूपचंद्र ने भी चकमार्ग से अतिक्रमण हटाने की मांग की। वहीं मोइयाकपूर निवासी ने पशुचर खाते की भूमि को कब्जामुक्त कराने की शिकायत की। डीएम ने दोनों मामलों में एसडीएम सोहावल को जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
थाना पूराकलंदर क्षेत्र के पुरवा सरियावा निवासी ने चकमार्ग पर अतिक्रमण और नवीन परती भूमि पर निर्माण की शिकायत की। इस पर डीएम ने एसडीएम को जांच कर आवश्यक कार्रवाई और उत्तरदायित्व निर्धारित करने को कहा। अरथर निवासी की ओर से बंटवारे के आदेश का मौके पर अनुपालन कराने की मांग पर भी एसडीएम को नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
पांचों तहसीलों में 508 शिकायतें
संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान जिले की पांचों तहसीलों में कुल 508 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 67 का मौके पर निस्तारण किया गया। सोहावल में 142 में से 20, सदर में 139 में से 18, रुदौली में 42 में से 8, मिल्कीपुर में 149 में से 15 तथा बीकापुर में 36 में से 6 शिकायतों का तत्काल निस्तारण हुआ।
जिलाधिकारी ने शेष शिकायतों का निस्तारण अधिकतम दो सप्ताह के भीतर करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि शिकायतों के निस्तारण में केवल औपचारिकता न बरती जाए, बल्कि शिकायतकर्ता को वास्तविक राहत दिलाना सुनिश्चित किया जाए।