अयोध्या। जिला चिकित्सालय के मनोविश्लेषक डॉ. आलोक मनदर्शन ने कहा है कि गबन या आर्थिक अपराध केवल कानूनी नहीं, बल्कि कई मामलों में मनोवैज्ञानिक कारणों से भी जुड़े हो सकते हैं। उनके अनुसार कुछ व्यक्तित्व विकार ऐसे होते हैं, जिनमें व्यक्ति के आर्थिक अपराध की ओर आकर्षित होने की संभावना अधिक रहती है।
डॉ. मनदर्शन ने बताया कि विभिन्न शोधों में पाया गया है कि नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर (आत्ममुग्ध व्यक्तित्व विकार) से ग्रस्त कुछ लोगों में संगठित आर्थिक अपराध करने की प्रवृत्ति अपेक्षाकृत अधिक देखी जाती है। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्तित्व को मुख्य रूप से चार वर्गों में बांटा जाता है। इनमें ग्रैंडिओस नार्सिसिस्ट, जो स्वयं को श्रेष्ठ मानते हैं; विक्टिम नार्सिसिस्ट, जो स्वयं को पीड़ित दिखाकर लाभ लेने का प्रयास करते हैं; मलिग्नेंट नार्सिसिस्ट, जिनमें क्रूरता और संवेदनहीनता अधिक होती है; तथा कम्युनल नार्सिसिस्ट, जो बाहर से समाजसेवी दिखते हैं लेकिन भीतर से समाजविरोधी गतिविधियों में संलिप्त हो सकते हैं।
उन्होंने बताया कि मस्तिष्क में डोपामिन, सेरोटोनिन, ऑक्सीटोसिन और एंडॉर्फिन जैसे रसायन मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार को प्रभावित करते हैं। सामान्य व्यक्ति को सकारात्मक उपलब्धियों से डोपामिन के माध्यम से संतुष्टि और खुशी मिलती है, जबकि कुछ आत्ममुग्ध व्यक्तित्व वाले लोगों को अनैतिक या आपराधिक कार्यों से भी वैसी ही संतुष्टि महसूस हो सकती है। इससे ऐसे कृत्यों की पुनरावृत्ति की संभावना बढ़ जाती है।
डॉ. मनदर्शन के अनुसार कमजोर आत्मनियंत्रण, निगरानी का अभाव तथा धन या संसाधनों तक आसान पहुंच भी गबन जैसे अपराधों के अवसर पैदा कर सकती है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ व्यक्तित्व निर्माण, नैतिक मूल्यों का विकास और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता ऐसे अपराधों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।