जलालपुर, अंबेडकर नगर। न्यायालय के आदेश की अवहेलना, कथित अवैध वसूली और शिकायतकर्ता किसान के साथ अभद्र व्यवहार का मामला सामने आया है। आरोप है कि जिलाधिकारी से शिकायत किए जाने से नाराज लेखपाल ने अपने साथियों के साथ मिलकर किसान के साथ गाली-गलौज की और विरोध करने पर मारपीट की धमकी देकर वहां से भगा दिया। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
मामला तहसील क्षेत्र के ग्राम रतना का है। गांव निवासी सर्वेश पुत्र स्वर्गीय दयाराम के अनुसार खेत के बंटवारे को लेकर वर्ष 2021 में उपजिलाधिकारी न्यायालय में वाद दाखिल किया गया था। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद न्यायालय ने संबंधित लेखपाल को एक-चौथाई हिस्से का कुर्रा बंटवारा कर रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने का आदेश दिया था। आरोप है कि स्पष्ट आदेश के बावजूद हल्का लेखपाल दिनेश राम ने जानबूझकर रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत नहीं की और लगातार टालमटोल करता रहा।
पीड़ित किसान का कहना है कि न्यायालय के आदेश का पालन न होने पर उसने 21 मई 2026 को जिलाधिकारी से लिखित शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने तहसीलदार से रिपोर्ट तलब करते हुए न्यायालय में कुर्रा बंटवारे की रिपोर्ट प्रस्तुत कराने के निर्देश दिए। आरोप है कि जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद ही संबंधित रिपोर्ट न्यायालय में दाखिल की गई।
सर्वेश ने आरोप लगाया कि रिपोर्ट लगाने के नाम पर लेखपाल ने अपने निजी मुंशी पवन पांडे के माध्यम से 1500 रुपये की अवैध वसूली भी की। इसके बाद जब उसने रिपोर्ट की प्रति प्राप्त कर उसका परीक्षण किया तो पाया कि उसकी खतौनी से सटे रास्ते को उसकी भूमि में दर्शाते हुए लगभग डेढ़ बिस्वा रकबा कम कर दिया गया है।
पीड़ित के अनुसार रकबा कम होने की जानकारी मिलने पर वह तहसील परिसर स्थित लेखपाल संघ भवन में संबंधित लेखपाल से मिलने पहुंचा। वहां उसने कथित अवैध वसूली और भूमि का रकबा कम किए जाने का विरोध किया तो लेखपाल दिनेश राम आगबबूला हो गया और गाली-गलौज करने लगा। आरोप है कि वहां मौजूद अमित यादव सहित अन्य लोगों ने भी लेखपाल का पक्ष लेते हुए उसे मारपीट की धमकी दी और वहां से भगा दिया।
किसान का कहना है कि जिलाधिकारी से शिकायत किए जाने के कारण लेखपाल उससे व्यक्तिगत रंजिश रखने लगा है। इसी वजह से गलत रिपोर्ट तैयार कर उसकी भूमि का रकबा कम किया गया। उसने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर न्यायालय के आदेश की अवहेलना, कथित अवैध वसूली, गलत रिपोर्ट तैयार करने तथा अभद्रता और धमकी देने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।