Monday, March 9, 2026
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एकात्म मानववाद के प्रणेता को जयंती पर दी गई श्रद्धांजलि


अयोध्या। एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती जिले के सभी बूथों पर श्रद्धापूर्वक मनाई गई। पूर्व सांसद लल्लू सिंह, विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, महापौर गिरीशपति त्रिपाठी, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि आलोक सिंह रोहित और महानगर अध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव ने नगर निगम परिसर स्थित उपाध्याय जी की प्रतिमा की साफ-सफाई कर माल्यार्पण किया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर नगर निगम कार्यालय में स्वच्छता अभियान चलाया गया तथा एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत पौधरोपण भी किया गया।

पूर्व सांसद लल्लू सिंह ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जीवन दर्शन हमें समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक सेवा और सहयोग पहुंचाने की प्रेरणा देता है। विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने कहा कि एकात्म मानववाद भारतीय राजनीति को नई दिशा देने वाला सिद्धांत है। आज उनकी नीतियां देश को आत्मनिर्भर भारत बनाने में मार्गदर्शक हैं। उनकी विचारधारा आज भी प्रासंगिक है। महापौर गिरीशपति त्रिपाठी ने कहा कि दीनदयाल जी की जयंती केवल स्मरण का दिन नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण की प्रतिज्ञा का अवसर है। मौके पर सहकारी बैंक के सभापति धर्मेन्द्र प्रताप सिंह टिल्लू, पूर्व जिलाध्यक्ष अवधेश पाण्डेय बादल, अभिषेक मिश्र, रवि सोनकर विशाल सिंह, बब्लू मिश्र, रीना द्विवेदी, आलोक द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।


 महानगर व जिले ईकाई ने किया संगोष्ठी



 पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर भाजपा कार्यालय सहादतगंज में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एमएलसी साकेत मिश्र ने कहा कि दीनदयाल जी ने भारतीय राजनीति को राष्ट्रहित और जनहित से जोड़ने का कार्य किया। उनका एकात्म मानववाद’ आज भी समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने का मार्ग दिखाता है। हमें उनके जीवन-दर्शन से प्रेरणा लेकर संगठन और समाज सेवा को आगे बढ़ाना चाहिए। जिलाध्यक्ष संजीव सिंह ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय भारतीय जनमानस के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं। उनकी विचारधारा हमें सेवा, समर्पण और संगठन की दिशा देती है। इस दौरान बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।

महानगर इकाई द्वारा सर्किट हाउस सभागार में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एमएलसी रामचन्द्र प्रधान ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानववाद का सिद्धांत भारतीय संस्कृति और जीवनदर्शन की आत्मा है। यह सिद्धांत हमें बताता है कि व्यक्ति, समाज और राष्ट्र तीनों एक-दूसरे से अलग नहीं हैं, बल्कि परस्पर पूरक हैं।

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