◆ बंदरों से लेकर गोवंश तक को मिलेगा इलाज, मंदिरों को मिलेगा निशुल्क दूध प्रसाद
अयोध्या। धार्मिक नगरी अयोध्या अब न केवल आध्यात्मिक आस्था का केंद्र रहेगी, बल्कि जीवदया और गौसेवा का भी आदर्श स्थल बनने जा रही है। मुंबई के प्रतिष्ठित व्यवसायी और युवा जैन संघ के प्रतिनिधि डॉ. गिरीशभाईसत्रा की ओर से अयोध्यास्थितगीताभवनपरिसरमेंएकवृहदगौशाला का निर्माण कराया जाएगा। यह गौशाला केवलगौसेवातकसीमितनरहकर ‘जीवदयाकेंद्र‘ के रूप में काम करेगी, जिसमें गोवंशकेसाथ–साथघायलबंदरोंऔरअन्यजीव–जंतुओंकीचिकित्सा की भी व्यवस्था होगी।
ये बातें विश्वहिंदूमहासंघ (गौरक्षाप्रकोष्ठ) केप्रदेशअध्यक्षप्रवीणदुबे ने बताई। उन्होंने बताया कि अयोध्या में बड़ी संख्या में बंदर बिजली करंट या दुर्घटनाओं में घायल हो जाते हैं, लेकिन उचित इलाज की सुविधा न होने से कई बार वे असमय मर जाते हैं। इस नई गौशाला में प्रशिक्षितचिकित्सकीयस्टाफ की तैनाती होगी, जो इन पशु-पक्षियों की सेवा में समर्पित रहेगा।
गौशाला से प्राप्तदूधकोअयोध्याकेउनमंदिरोंमेंनिशुल्कवितरितकियाजाएगा, जहां स्वयं की गौशालाएं नहीं हैं। यह दूध संतोंकेभोगवभगवानकोअर्पणहेतुप्रसादरूपमें प्रदान किया जाएगा।
प्रवीण दुबे ने बताया कि डॉ. गिरीशभाई सत्रा पिछलेपाँचवर्षोंसेउत्तरप्रदेशकीविभिन्नगौशालाओंकाभ्रमणकर, समय-समय पर आर्थिकसहायता, हराचारा, भूसावअन्यआवश्यकसंसाधन उपलब्ध कराते रहे हैं। एटा, आगरा, बरेली, गाजीपुर, कौशांबी, प्रयागराज, मिर्जापुर, गोंडा, सुल्तानपुर, बांदा, चित्रकूट, काशी, मथुरा, वृंदावन, बरसाना, गोला गोकर्णनाथ जैसे जिलों में उन्होंने अपनी सेवा का विस्तार किया है।
अब उन्होंने अपनीमाताजीकेनामसेअयोध्यामेंस्थायीरूपसेगौशालानिर्माणकासंकल्पलियाहै, जिससे गोसेवाकेसाथ–साथजीवमात्रकीसेवाकोअयोध्यातीर्थक्षेत्रमेंस्थायीरूपसेस्थापितकियाजासके। यह विशेष गौशाला अगलेदोमाहमेंपूर्णतःकार्यरत हो जाएगी। यह पहल न केवल गौसंवर्धन और धार्मिकसेवा की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि समाजमेंजीवदयाकीभावनाकोसुदृढ़ करने वाली ऐतिहासिक पहल भी मानी जा रही है।