Saturday, March 7, 2026
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ज्ञान स्मारक महिला महाविद्यालय में गुरु पूर्णिमा पर दीक्षा समारोह आयोजित


जलालपुर, अम्बेडकर नगर। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर ज्ञान स्मारक महिला महाविद्यालय, आलमपुर अमरताल,में एक भव्य दीक्षा समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा, सनातन वैदिक मूल्यों, और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में संस्कारों की भूमिका पर विद्वानों द्वारा विचार व्यक्त किए गए।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसे मुख्य अतिथि डॉ. अभय कुमार मौर्य, प्रधानाचार्य, संत कबीर इंटरमीडिएट कॉलेज सैदपुर, ने संपन्न किया। उन्होंने अपने संबोधन में गुरु के महत्व, संस्कार आधारित शिक्षा, और राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि अशोक कुमार पांडे, पूर्व प्राचार्य, नवज्योत इंटर कॉलेज, हजपुरा, ने वैदिक काल की गुरुकुल एवं आश्रम परंपरा तथा प्राचीन भारतीय विश्वविद्यालयों की शिक्षा पद्धति पर चर्चा करते हुए आज के युग में गुरु की भूमिका और मूल्यों की पुनर्स्थापना की आवश्यकता पर बल दिया। अन्य विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे प्रवीण कुमार मिश्रा, प्रधानाचार्य, श्यामलाल इंटर कॉलेज, मालीपुर, ने नई शिक्षा नीति, गुरु-शिष्य संबंध, और शैक्षिक व सामाजिक परिवर्तन पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. अभिषेक सिंह, वरिष्ठ समाजवादी नेता एवं रानी लक्ष्मीबाई इंटर कॉलेज के प्रबंधक, ने नारी शिक्षा, संस्कार, और समाज में गुरु की भूमिका को ऐतिहासिक और वर्तमान संदर्भों में जोड़ते हुए सारगर्भित वक्तव्य प्रस्तुत किया।

महाविद्यालय की संरक्षक प्रोफेसर आई.जे. सिंह ने स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण परमहंस की गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वस्थ और समरस समाज निर्माण में शिक्षण संस्थानों की अहम भूमिका होती है। उन्होंने सभी आगंतुक अतिथियों का आभार भी व्यक्त किया।

कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार प्रजापति ने किया। इस अवसर पर पूर्व प्राध्यापक श्री राम केवल, संस्कृत विद्यालय सिकंदरपुर के प्रबंधक श्री हनुमान यादव, श्री अग्रसेन, राजेश गुप्ता, रानी गाना जैन, एवं अभिभावकगण की गरिमामयी उपस्थिति रही।

समारोह में छात्राओं की बड़ी संख्या में सहभागिता रही, वहीं गृह विज्ञान विभाग की प्राध्यापिका प्रियंका श्रीवास्तव, विकास, एवं सुनीता ने सफल आयोजन में विशेष योगदान दिया। कार्यक्रम ने गुरु-शिष्य परंपरा को जीवंत करते हुए शिक्षा जगत में संस्कृति और मूल्यों की पुनर्स्थापना की दिशा में एक सार्थक पहल की।

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