Saturday, March 7, 2026
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होली का पौराणिक ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक भी है महत्व, स्वास्थ्य के लिए है लाभदायक


◆ मर्यादा का समावेश रहा है अवध की होली में, हजारों वर्षो से रिश्तो करती आई है मजबूत


◆ दो दिन तक रहती है होली की धूम, एक दूसरे के घर जाकर बधाई देने का है रिवाज


अयोध्या। होली का पर्व का केवल पौराणिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक महत्व भी है। मानव मतिष्क का सबसे अधिक अनुकूल बीस से तीस डिग्री तापमान होता है। एक शोध के मुताबिक मनुष्य के शरीर की बीमारियों का सबसे बड़ा कारण मानसिक तनाव होता है। मानसिक तनाव से कोई भी अछूता नहीं है। लोगो में इसके कारण अलग-अलग हो सकते है। मनोविशेषज्ञों के मुताबिक कमरे में बीस से तीस डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच आने वाला उमंग, खुशी व उल्लास का मिश्रण साल भर के तनाव से ग्रसित मानव मतिष्क को फिर से रिचार्ज करने करने का कार्य करता है। होली के बाद जिला अस्पताल में मानसिक रोगो का इलाज कराने आने वाले मरीजों की संख्या कमी इसका परिचायक है। होली का असर मानसिक मरीजों पर करीब एक महीने तक रहता है। अवध की होली में मर्यादा का समावेश रहता है। होली पर्व हजारों वर्षो से रिश्तो को मजबूत करने का माध्यम बनती रही है।

जिला अस्पताल के मनोपरामर्शदाता डा. आलोक मनदर्शन के मुताबिक होली का मानसिक स्वास्थ्य पर काफी अच्छा असर पड़ता है। उन्होंने बताया कि होली पर लोगो को खुशी के जस्बे का अहसास होता है। यह मनोतनाव व उदासी को दूर करता है। उन्होंने बताया कि इस समय लोगो मे ड्रिप्रेशन व एंजाईटी की बीमारी काफी ज्यादा बढ़ गयी है। जागरुकता के अभाव में इसका इलाज कराने के लिए काफी कम लोग मनोविशेषज्ञ के पास आते है। बसंत ऋतु का तापमान ड्रिपेशन जैसी बीमारियों का इलाज करने के लिए काफी अच्छा माना जाता है। इस तापमान में  शरीर में हैप्पी हार्मोन का संचार काफी ज्यादा होता है। होली ड्रिपेशन के मरीज के लिए बूस्टर डोज का काम करती है। घर में अगर कोई ड्रिपेशन का मरीज हो व होली के उमंग में वह शामिल हो, तो उसकी ड्रिप्रेशन हमेंशा के लिए समाप्त हो सकती है। आपसी रिश्तो को मधुर करने में भी होली का बड़ा योगदान रहता है।

उन्होंने बताया कि होली का मानसिक स्वास्थ्य पर काफी अच्छा असर पड़ता है। लेकिन जब होली को लेकर उन्माद की पराकाष्टा बढ़ जाती है, तो होली का नकारात्मक असर भी पड़ता है। इसमें नशे का बड़ा योगदान रहता है। उन्माद की पराकाष्टा होली में रंजिश को जन्म देती है। जिसका नुकसान व्यक्ति को काफी समय तक भुगतना पड़ता है। होली में नशें से अगर लोग दूरी बना ले। तो इसका अच्छा असर दिखाई पड़ता है।

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