Friday, March 6, 2026
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श्रीकृष्ण- रुक्मिणी विवाह प्रसंग सुनकर भावविभोर हुए श्रोता


अंबेडकरनगर। कटेहरी विधानसभा के कसियादासपुर गांव में कथा के यजमान पूर्व शिक्षक दयाशंकर तिवारी के निवास पर कथा वाचक पंडित तुलसीराम शास्त्री महाराज जी ने कथा में बताया की कंश वध के बाद अपने दामाद के मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिए 17 बार आक्रमण व भगवान श्री कृष्ण को छल से मारने की नियत से कालयवन से संधि कर लिया।



श्री कृष्ण ने कालयवन से लड़ने के बजाय भागने की नियत अपनाते हुए भागते भागते एक गुफा में चले गए और कालयवन पीछा करते हुए जब उस गुफा में घुसा तो वहा एक चादर ओढ़े कोई सोया हुआ उसे दिखाई दिया जिसको श्री कृष्ण समझकर कालयवन ने लात मारी तब सोया हुआ वह मनुष्य जब उठा और अपनी आंखे खोला तो उसकी दिव्य तेज से कालयवन जलकर भस्म हो गया। काल यवन को गुफा में जो मनुष्य सोया हुआ दिखाई दिया वाकई में इक्ष्वाकु वंश के महाराजा मांधाता के पुत्र राजा मुचुकुंद थे। तत्पश्चात कथा वाचक पंडित तुलसीराम शास्त्री ने भगवान श्री कृष्ण-रुक्मिणी के विवाह का प्रसंग सुनाया। भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी का वेश धारण किए कलाकारों पर श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर स्वागत कर विवाह के मंगल गीत गाकर नृत्य किया। शास्त्री जी ने श्रद्धालुओं को भगवान श्री कृष्ण की कई लीलाओं के बारे में वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को कथा के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि रुक्मिणी विदर्भ देश के राजा भीष्म की पुत्री और साक्षात लक्ष्मी जी का अवतार थी। रुक्मिणी ने जब देवर्षि नारद के मुख से श्रीकृष्ण के रूप, सौंदर्य एवं गुणों की प्रशंसा सुनी तो उसने मन ही मन श्रीकृष्ण से विवाह करने का निश्चय किया। रुक्मिणी का बड़ा भाई रुक्मी श्रीकृष्ण से शत्रुता रखता था और अपनी बहन का विवाह राजा दमघोष के पुत्र शिशुपाल से कराना चाहता था। रुक्मिणी को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने एक ब्राह्मण संदेशवाहक द्वारा श्रीकृष्ण के पास अपना परिणय संदेश भिजवाया। तब श्रीकृष्ण विदर्भ देश की नगरी कुंडीनपुर पहुंचे और वहां बारात लेकर आए शिशुपाल व उसके मित्र राजाओं शाल्व, जरासंध, दंतवक्त्र, विदु रथ और पौंडरक को युद्ध में परास्त करके रुक्मिणी का उनकी इच्छा से हरण कर लाए। तत्पश्चात श्रीकृष्ण ने द्वारिका में अपने संबंधियों के समक्ष रुक्मिणी से विवाह किया। इस दौरान श्रद्धालुओं को धार्मिक भजनों पर नृत्य करते व जयकारे लगाते हुए भी देखा गया जिससे माहौल धर्ममय हो गया। उसके बाद बड़े ही धूमधाम से आरती और कीर्तन हुआ। शनिवार की कथा में मुख्य अतिथि के रूप में देव इंद्रावती महाविद्यालय के प्रबंधक डा. राणा रणधीर सिंह व युवा भाजपा नेता संगम पाण्डेय बाबा, अभिमन्यु अग्रहरी, पत्रकार महेंद्र मिश्र, सोनू पाठक,प्रधान शोले बर्मा , बिशाल उपाध्याय,अविनाश तिवारी, आदि सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे ।

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