Saturday, March 7, 2026
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योग करता है रुग्ण- मनोवृत्ति निरोध, मेडिटेशन है मूड -स्टेबलाइज़र


◆ योग व ध्यान की रेसिपी,है ब्रेन-वेव थिरैपी


 अयोध्या। इंटरनेशनल योगा-डे 21-जून पूर्व-संध्या वार्ता  मे डा आलोक मनदर्शन ने बताया कि “योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः”  यानि “योग मन के उतार-चढ़ाव को शांत व स्थिर करता है”। योग व ध्यान से मूड-स्टेबलाइज़र हार्मोन सेराटोनिन व मनोशांत हार्मोन गाबा में  अभिवृद्धि होने से स्ट्रेस-हार्मोन कार्टिसाल व एड्रेनलिन में कमी आती है। इस प्रकार यौगिक क्रियाएं अवसाद, उन्माद,चिंता घबराहट, टेंशन-हेडेक, अनिद्रा,फोबिया आदि का शमन करती है । साथ ही विभिन्न मनोशारीरिक समस्याओं जैसे उच्च रक्तचाप, डायबिटीज़, पेट की खराबी व क्रोनिक फटिग सिंड्रोम आदि में अति लाभदायक होती है।

डा आलोक मनदर्शन

उन्होंने बताया कि योग व ध्यान विभिन्न आवृत्ति की मनोतरंग पैदा करता है जिसे ब्रेन-वेव रिकॉर्डिंग या इलेक्ट्रो-इनसिफैलोग्राम या ब्रेन-मैपिंग से जांचा जा सकता है । मनोचिकित्सा में चार तरह के ब्रेन-वेव संदर्भित है,जिसे  बीटा ,अल्फा, थीटा व डेल्टा नाम से जाना जाता है। बीटा-वेव सबसे अधिक फ्रिक्वेंसी की होती है,जो तनाव की मनोदशा तथा अल्फा-वेव मध्यम फ्रिक्वेंसी की होती है, जो सामान्य अवस्था को प्रदर्शित करती है । अल्प-ध्यान की अवस्था में  थीटा-तरंग मिलती जो कि निद्राचक्र के स्वप्न-समय मे भी दिखती है। गहन-ध्यान या डीप-मेडिटेशन की अवस्था में सबसे धीमी ब्रेन-वेव डेल्टा मिलती है। अवसाद व चिंता-विकार के रोगियो का इलाज अब आई टी बी एस यानि “इंटरमिटेंट थीटा बर्स्ट स्टिमुलेशन” से किया जा रहा है, जिसमे मरीज के ब्रेन में शान्त-तरंग थीटा को कृत्रिम रूप से भेजा जाता है तत्पश्चात ध्यान व योग से प्रतिस्थापित किया जाता है। इसे ब्रेन-वेव थिरैपी भी कहा जाता है।

उन्होंने बताया कि सुसाइड व होमिसाइड त्रासदी के हाई रिस्क ग्रुप के युवा व किशोरों में एकेडमिड -प्रेशर,कैरियर- स्ट्रेस, जॉब डिमांड, फैमिली  कांफ्लिक्ट व भौतिकवादी संस्कृति से अपनी सेहत को नज़र अंदाज़ करने पर मजबूर दिख रहे हैं । वही दूसरी तरफ समृद्ध वर्ग लक्ज़री लाइफ स्टाइल मे सेहत गवां रहा है। अंतर्राष्ट्रीय योग-दिवस  सभी को ध्यान व योग के कम से कम 30 मिनट  जीवनचर्या का हिस्सा बनाने का संदेश देता है ताकि भौतिक समृद्धि के साथ आध्यात्मिक,मानसिक व मनोशारीरिक स्वास्थ को समृद्ध किया जा सके। विश्व शांति व सद्भाव के लिये भी योग का सिद्धांत अति प्रसंगिक है।

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