Friday, March 6, 2026
HomeAyodhya/Ambedkar Nagarअयोध्यादुष्यन्त कुमार की परंपरा के शायर हैं याराजी बेदार’ : स्वप्निल श्रीवास्तव

दुष्यन्त कुमार की परंपरा के शायर हैं याराजी बेदार’ : स्वप्निल श्रीवास्तव


अयोध्या। जनवादी लेखक संघ फैजाबाद और अवध साहित्य संगम के संयुक्त तत्वावधान में आभा होटल, मोतीबाग सभागार में रामजीत यादव ‘बेदार’ (याराजी बेदार) के ग़ज़ल-संग्रह जलते सवालों तक का लोकार्पण हुआ। कार्यक्रम में जनपद के वरिष्ठ साहित्यकार बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

अध्यक्षीय संबोधन में वरिष्ठ कवि स्वप्निल श्रीवास्तव ने कहा कि बेदार जी की ग़ज़लें व्यवस्था से टकराती हैं और दुष्यन्त कुमार की परंपरा से जुड़ती हैं। उन्होंने कहा कि कविता हमेशा प्रतिरोध की आवाज़ होती है और बेदार जी ने गाँव के परिवर्तनों को गहराई से दर्ज किया है। आलोचक रघुवंशमणि ने कहा कि ग़ज़ल जैसी चुनौतीपूर्ण विधा में बेदार जी ने अनुभव और काव्यकला दोनों को नए ढंग से प्रस्तुत किया है। उन्होंने माज़ी के अक्स को संगीतात्मक और प्रभावशाली ग़ज़ल बताया।

अपने वक्तव्य में याराजी बेदार ने कहा कि उनकी रचनाओं का केंद्र समाज का शोषित तबका और स्त्रियाँ हैं। साहिर लुधियानवी से प्रेरणा लेकर उन्होंने पीड़ा और संघर्ष को अभिव्यक्त किया है।

हुसाम हैदर ने कहा कि उनकी ग़ज़लों में शऊर और फ़िक्र की गहराई है। डॉ. विशाल श्रीवास्तव ने उन्हें तेग़कलम का शायर बताया, जिनकी कविताएँ किसान, स्त्री और हाशिये के समाज को आवाज़ देती हैं।

जलेस अध्यक्ष मो. ज़फ़र ने उनके कहन के अलहदा अंदाज को विशेषता बताया। लोकार्पण समारोह को कृष्ण प्रताप सिंह, इंदुभूषण पांडे, ऊष्मा सजल, आर डी आनंद, आशाराम जागरथ, डॉ नीरज सिन्हा नीर, इल्तिफ़ात माहिर, विनीता कुशवाहा, पूजा श्रीवास्तव, राजीव श्रीवास्तव, अखिलेश सिंह, मांडवी सिंह, मो शफीक, रवींद्र कबीर, मोतीलाल तिवारी,  रामदास सरल, परसुराम गौड़, जसवंत अरोरा, शोभनाथ फैज़ाबादी, बृजेश श्रीवास्तव,विजय श्रीवास्तव ,निर्मल गुप्ता,आराधना सिंह,प्रज्ञा पांडे,शोभावती, संदीप सिंह, स्वदेश मल्होत्रा,बाबूराम गौड़, सीपीआई नेता अशोक तिवारी,माले नेता अतीक अहमद,समाजसेवी आरजे यादव,रामचरण रसिया ने भी संबोधित किया। समारोह में अतीक अहमद, अशोक कुमार तिवारी, रविशंकर चतुर्वेदी, डॉ प्रदीप कुमार सिंह, बृजेश श्रीवास्तव, महावीर, राम सुरेश, विभा यादव, मधु यादव, समीर शाही, राजीव मतवाला, मो आफाक सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, संस्कृतिकर्मी, समाजसेवी और संभ्रांत नागरिक मौजूद रहे।

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