@ विनोद तिवारी
अयोध्या। प्रदेश के तीन प्रमुख कृषि विश्वविद्यालय आज भी नियमित कुलपतियों के बिना संचालित हो रहे हैं। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज की जिम्मेदारी डॉ. बृजेंद्र सिंह को सौंपी गई है, जबकि वे पहले से ही अन्य महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।
चंद्रशेखर आज़ाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर में मंडलायुक्त के. विजयेन्द्र पांडियन प्रभारी कुलपति के रूप में कार्यरत हैं। सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ की कमान डॉ. के.के. सिंह के हाथों में है। तीनों विश्वविद्यालय नियमित कुलपति की नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
कुमारगंज कृषि विश्वविद्यालय को लेकर स्थिति विशेष रूप से चर्चा में है। यहां डॉ. बृजेंद्र सिंह पहले छह माह प्रभारी रहे, इसके बाद दो कार्यकालों में लगभग छह वर्षों तक कुलपति के पद पर कार्य किया। कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, का प्रभारी कुलपति बनाया गया और बाद में स्थायी कुलपति नियुक्त कर दिया गया। इसके साथ ही कुमारगंज कृषि विश्वविद्यालय का प्रभारी प्रभार भी पुनः उन्हें सौंपा गया। साथ ही कुशीनगर में नव निर्मित भगवान गौतम बुद्ध कृषि विश्वविद्यालय की नोडल भूमिका भी वे निभा रहे हैं। इसे लेकर उच्च कृषि शिक्षा व्यवस्था में पदों के केंद्रीकरण को लेकर सवाल उठने लगे हैं। डॉ. बृजेंद्र सिंह के कार्यकाल में कुमारगंज कृषि विश्वविद्यालय को नैक से ए++ ग्रेड प्राप्त हुआ, जो एक बड़ी उपलब्धि है। कुमारगंज कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. जीत सिंह संधू के अनुसार, 19 माह के कार्यकाल के बाद उनके त्यागपत्र देने के पश्चात डॉ. बृजेंद्र सिंह को प्रभारी कुलपति नियुक्त किया गया था।