◆ फिजीशियन कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, ईएनटी व चेस्ट विशेषज्ञ के पद खाली, स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित
अयोध्या। जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी आज भी जस की तस बनी हुई है। 10 अक्टूबर को उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक के निरीक्षण के दौरान यह समस्या प्रमुख रूप से सामने आई थी। उनके निर्देशों के बाद भी स्थिति में कोई ठोस बदलाव नहीं हो सका है।
सबसे गंभीर समस्या फिजीशियन की कमी है। अस्पताल में फिजिशियन के तीन स्वीकृत पद हैं, लेकिन वर्तमान में केवल डॉ. प्रशांत द्विवेदी सेवाएं दे रहे हैं। पुनर्नियोजन के आधार पर डॉ. नानकसरन की तैनाती है, लेकिन इससे भी व्यवस्था सुचारु नहीं हो पा रही। चेस्ट फिजीशियन के दोनों पद रिक्त हैं। इसके अलावा कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट और ईएनटी सर्जन की अनुपस्थिति मरीजों के इलाज में बाधा बनी हुई है। सीएचसी और पीएचसी से रेफर होकर आने वाले मरीजों को जिला अस्पताल में विशेषज्ञ उपचार न मिल पाने के कारण कई बार मेडिकल कॉलेज जाना पड़ रहा है। अस्पताल में फिलहाल स्वीकृत पदों की तुलना में लगभग आधे डॉक्टरों की ही तैनाती है। लगातार विभागीय पत्राचार के बावजूद विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती नहीं हो सकी है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है।
अस्पताल में एक समय में केवल एक इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर (EMO) ड्यूटी पर रहता है, जिसे इलाज के साथ ही मेडिको-लीगल मामलों का भी जिम्मा निभाना पड़ता है। मरीजों की संख्या ज्यादा होने पर कई बार इलाज में देरी होती है, जिससे तकरार और अव्यवस्था की स्थिति बन जाती है।
रात में हालात और चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं। गंभीर मरीजों का दबाव बढ़ जाता है, जबकि डॉक्टरों की संख्या अपर्याप्त रहती है। तीन अक्टूबर को नार्वे से आई टीम ने भी अस्पताल का निरीक्षण कर इमरजेंसी सिस्टम को मजबूत करने की सलाह दी थी, जिसमें EMO की संख्या बढ़ाना प्राथमिकता में शामिल था।
जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश सिंह के अनुसार “विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए समय-समय पर विभाग को पत्र भेजे जा रहे हैं।