अयोध्या। बिजली विभाग से निकाले गए संविदा कर्मचारियों का आंदोलन बुधवार को उस समय बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया, जब धरने में शामिल एक कर्मचारी विकास तिवारी उर्फ विक्की की मौत हो गई। 63 दिनों से चल रहे धरने में नियमित भागीदारी करने वाले विकास की तब्यित खराब होने के बाद जिला चिकित्सालय तथा वहां से मेडिकल कालेज भेजा गया। जहां उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। मौत का संदिग्ध मानते हुए चिकित्सक ने पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
कैंट उपकेंद्र पर संविदा कर्मी के रूप में कार्यरत रहे विकास नौकरी से हटाए जाने के बाद से मानसिक अवसाद में थे। साथियों के मुताबिक, वह कई दिनों से खुद को बेकार और निरर्थक महसूस कर रहा था। अक्सर वह यह भी कहता था कि नौकरी चली गई, अब जीने का कोई मकसद नहीं।
विकास की मौत की खबर मिलते ही मुख्य अभियंता कार्यालय के सामने चल रहे धरना स्थल पर आक्रोश फैल गया। आंदोलनकारी कर्मचारियों ने दो मिनट का मौन रखकर उसे श्रद्धांजलि दी और अपनी मांगों पर सरकार तथा बिजली विभाग की चुप्पी को अमानवीय बताया।
मजदूर संघ के जिलाध्यक्ष जय गोविंद ने कहा, यह आत्महत्या नहीं, यह सिस्टम की हत्या है। अगर समय रहते हमारी मांगें नहीं मानी गईं तो हम सभी कर्मचारी मुख्य अभियंता कार्यालय के सामने सामूहिक आत्मदाह करेंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य अभियंता अशोक चौरसिया ने अब तक एक बार भी धरनास्थल पर आकर कर्मचारियों की सुध नहीं ली। जय गोविंद के अनुसार, बिना सूचना या सुनवाई के करीब 500 संविदा कर्मचारियों को हटा दिया गया, जिससे सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर संकट आ खड़ा हुआ है।