◆ एसीएमओ डॉ. बीएन तिवारी की रहस्यमयी मौत के बाद अब धन की बरामदगी से बढ़ी हलचल
अंबेडकरनगर। जनपद में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक पुराना मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब एक दशक पूर्व रहस्यमयी परिस्थितियों में मृत पाए गए अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. ब्रह्मणारायण तिवारी के सरकारी आवास से 22 लाख से अधिक की नकदी बरामद की गई है। यह पूरी रकम 1000 और 500 रुपये के पुराने नोटों में है, जो अब चलन से बाहर हो चुके हैं।
2014 में मिली थी लाश, उसके बाद सील कर दिया गया था क्वार्टर
मूल रूप से प्रतापगढ़ निवासी डॉ. बीएन तिवारी मीरानपुर सीएचसी में कार्यरत थे और वहीं के सरकारी क्वार्टर में अकेले रहते थे। 29 जनवरी 2014 की सुबह जब वे बाहर नहीं निकले तो अधिकारियों को संदेह हुआ। सूचना मिलने पर प्रशासन ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया, जहां उनका शव बिस्तर पर पड़ा मिला। घटना को लेकर उस समय भी कई सवाल उठे थे, लेकिन मामला रहस्य में ही दबकर रह गया। इसके बाद उस सरकारी आवास को प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत सील कर दिया गया था।
जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला के निर्देश पर जब उस आवास की सील तोड़ी गई, तो वहां मौजूद कर्मचारियों को उस समय आश्चर्य हुआ जब बिस्तर के नीचे से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई। कुल राशि 22,48,505 रुपये थी, जिसे पुराने और अमान्य हो चुके नोटों में संग्रहित किया गया था।
सीएमओ ने दी जानकारी, राजकोष में जमा की गई राशि
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संजय कुमार शैवाल ने बताया कि जिलाधिकारी के आदेश पर पूरी नकदी को जब्त कर राजकीय कोष में जमा करा दिया गया है। साथ ही प्रमुख सचिव स्वास्थ्य, महानिदेशक चिकित्सा सेवाएं, अपर निदेशक, जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को इस प्रकरण की जानकारी दी गई है, ताकि आवश्यक कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सके।
गूंज उठा पुराना मामला, उठे कई नए सवाल
10 वर्षों तक सील कमरे में इतनी बड़ी धनराशि का पड़े रहना न सिर्फ आश्चर्यजनक है, बल्कि प्रशासनिक और विभागीय निगरानी पर भी सवाल खड़े करता है। यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सवाल यह है कि इस रकम का स्रोत क्या था, और यह इतने वर्षों तक कैसे छुपा रह गया।