Thursday, March 5, 2026
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स्ट्रेस हार्मोन से बिगड़ सकती है नींद, स्लीप डिसऑर्डर का बढ़ता खतरा


  चिंता और तनाव का सीधा असर निद्रा पर


 नींद हैब्रेन बैटरी चार्जर’, दो हफ्ते से ज्यादा समस्या हो तो लें परामर्श


अयोध्या। बढ़ती भागदौड़ और तनाव भरी जीवनशैली लोगों की नींद पर भारी पड़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि तनाव के दौरान शरीर में बढ़ने वाला हार्मोन कोर्टिसोल नींद के प्राकृतिक चक्र को प्रभावित करता है। इसके लगातार बढ़े रहने से मूड नियंत्रित करने वाला हार्मोन सेरोटोनिन और नींद के लिए जिम्मेदार मेलाटोनिन कम हो जाते हैं, जिससे स्लीप डिसऑर्डर की समस्या जन्म ले सकती है।

डा आलोक मनदर्शन
मनो परामर्शदाता, जिला चिकित्सालय अयोध्या

यह जानकारी जिला चिकित्सालय में आयोजित निद्रा जागरूकता सप्ताह के तहत वार्ता में मनोपरामर्शदाता डॉ. आलोक मनदर्शन ने दी। उन्होंने बताया कि सामान्य रूप से नींद पांच चरणों से होकर गुजरती है। बच्चों में एक निद्रा चक्र लगभग एक घंटे का होता है, जबकि वयस्कों में यह डेढ़ घंटे का होता है। एक स्वस्थ वयस्क के लिए औसतन साढ़े सात घंटे की नींद आवश्यक मानी जाती है।


नींद टूटने पर हो सकती हैं ये समस्याएं


उन्होनें बताया कि सोने के लगभग एक घंटे बाद नींद टूटने पर कुछ लोगों में स्लीप वॉकिंग (नींद में चलना) की समस्या हो सकती है, जिसे सोमनैम्बुलिज्म कहा जाता है। इस अवस्था में व्यक्ति अचेतन स्थिति में चलने लगता है। वहीं, सोने के ढाई से तीन घंटे के बीच नींद टूटने पर अचानक चीखकर उठना, धड़कन और सांस की गति तेज होना जैसी स्थिति को नाइटमेयर कहा जाता है। गहरी नींद के दौरान उठने पर मांसपेशियों में झटके, शरीर में झनझनाहट, पैर पटकना, नींद में बड़बड़ाना या शरीर का सुन्न हो जाना पैरासोमनिया के लक्षण हैं। बच्चों में नींद में बिस्तर गीला करना (बेड वेटिंग/नॉक्टर्नल एन्यूरिसिस) भी इसी श्रेणी में आता है।


स्लीप पैरालिसिस को समझें अंधविश्वास


डॉ. मनदर्शन ने बताया कि स्लीप पैरालिसिस के दौरान व्यक्ति को कुछ सेकंड के लिए शरीर सुन्न महसूस होता है। वह न बोल पाता है और न आंख खोल पाता है। कई बार ऐसा लगता है जैसे कोई सीने पर बैठा हो। इसे अंधविश्वास से जोड़ना गलत है, यह एक चिकित्सकीय स्थिति है।

उन्होंने कहा कि अगर नींद से जुड़ी परेशानी दो सप्ताह से अधिक बनी रहती है तो मनोपरामर्श अवश्य लेना चाहिए। क्योंकि अच्छी नींद मस्तिष्क को ऊर्जा देती है और मनो-शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है।

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