आलापुर अंबेडकर नगर। विकास खंड जहांगीरगंज के ग्राम खरुवांव निवासी किसान समशेर सिंह राजपूत ने परंपरागत खेती से हटकर कमरों में वैज्ञानिक विधि से मशरूम की खेती कर एक नई मिसाल पेश की है। उनकी यह पहल न सिर्फ लाभकारी साबित हो रही है, बल्कि क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत भी बन रही है।
समशेर सिंह देवरिया बाजार में खाद-बीज की दुकान संचालित करते हैं और पारंपरिक खेती के साथ-साथ अब आधुनिक खेती की ओर भी कदम बढ़ा चुके हैं। उन्होंने बताया कि जहां धान-गेहूं की फसल खेतों में उगाई जाती है, वहीं मशरूम की खेती कमरे के भीतर वैज्ञानिक तकनीक से की जा सकती है। इसमें लागत भी अपेक्षाकृत कम आती है और मुनाफा अधिक होता है।उन्होंने बताया कि मशरूम उत्पादन के लिए न तो किसी रासायनिक खाद की आवश्यकता होती है और न ही कीटनाशकों की। ऐसे में यह उत्पाद शुद्ध, स्वास्थ्यवर्धक और पूरी तरह जैविक होता है। कमरों में उत्पादन होने के कारण जानवरों या अन्य प्राकृतिक नुकसान की भी कोई आशंका नहीं रहती।
समशेर सिंह ने बताया कि मशरूम की खेती बेरोजगार युवाओं के लिए स्वरोजगार का बेहतर माध्यम बन सकती है। इसकी बाजार में अच्छी मांग है और कम लागत में अधिक मुनाफा मिलने की संभावना रहती है। वह स्वयं मशरूम की खेती से लाखों रुपये की बचत कर चुके हैं।
उनकी इस पहल से न केवल गांव में आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में कदम बढ़ा है, बल्कि अन्य किसानों और युवाओं को भी इससे प्रेरणा मिल रही है। क्षेत्रीय किसानों और ग्रामीणों ने भी उनके कार्य की सराहना करते हुए इसे गांव की उन्नति की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास बताया है।