अम्बेडकर नगर। भीटी थाना क्षेत्र के बेनीपुर गांव निवासी 30 वर्षीय युवक की जिला कारागार में फांसी लगाकर हुई मौत के बाद मामला तूल पकड़ता चला गया। शुक्रवार को परिजनों ने प्रशासन से मांगें पूरी न होने तक शव का अंतिम संस्कार करने से साफ इन्कार कर दिया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही प्रशासनिक व पुलिस महकमा हरकत में आ गया।
जेल में हुई इस संदिग्ध मौत को लेकर परिजन बेहद आक्रोशित थे। उनका कहना था कि मृतक की मौत आत्महत्या नहीं, बल्कि साजिशन हत्या है। परिजन आर्थिक सहायता, मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी तथा पूरे घटनाक्रम की सीबीआई अथवा न्यायिक जांच की मांग पर अड़े रहे।
जेल में निरुद्ध था मृतक
बेनीपुर गांव निवासी अशोक तिवारी के पुत्र सुशील तिवारी उर्फ ज्ञानू को गांव के ही युवक विकास दुबे के साथ मारपीट और धारदार हथियार से हमला करने के मामले में पुलिस ने 11 नवंबर को जेल भेजा था। बताया गया कि बुधवार सुबह जिला जेल के खाता संख्या-3, बैरक संख्या-18 के बाथरूम में उसने गमछे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जेल में बंद युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर फैलते ही गांव और जिले में सनसनी फैल गई।
सूचना मिलते ही मचा कोहराम
पुत्र की मौत की सूचना मिलते ही पिता अशोक कुमार तिवारी समेत पूरे परिवार में कोहराम मच गया। परिजन तत्काल पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाने लगे। काफी मान-मनौव्वल के बाद गुरुवार देर शाम शव को गांव लाया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गांव में पहले से ही भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। शुक्रवार सुबह परिजनों ने रिश्तेदारों की सलाह पर अंतिम संस्कार करने से इन्कार कर दिया और स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक शव का दाह-संस्कार नहीं किया जाएगा। इस सूचना से प्रशासन में हड़कंप मच गया।
गांव पहुंचे अधिकारी व जनप्रतिनिधि
सूचना मिलते ही उप जिलाधिकारी भीटी धर्मेंद्र कुमार सिंह, क्षेत्राधिकारी भीटी लक्ष्मीकांत मिश्रा, थाना प्रभारी महरुआ यादवेंद्र सोनकर, थाना प्रभारी अहिरौली अभिषेक त्रिपाठी, थाना प्रभारी सम्मनपुर सहित भारी पुलिस बल गांव पहुंचा और परिजनों को समझाने का प्रयास शुरू किया। इसी बीच पूर्व भाजपा प्रत्याशी वरिष्ठ नेता अवधेश कुमार द्विवेदी और क्षेत्रीय विधायक धर्मराज निषाद भी मौके पर पहुंचे और परिजनों से बातचीत कर उन्हें शांत कराने की कोशिश की।
मुख्यमंत्री को संबोधित सौंपा ज्ञापन
परिजनों ने मुख्यमंत्री को संबोधित शिकायती पत्र सौंपते हुए पूरे मामले की सीबीआई/न्यायिक जांच, मृतक की पत्नी दीपमाला को दो करोड़ रुपये की अहेतुक सहायता और सरकारी नौकरी देने की मांग रखी। साथ ही 10 वर्षीय पुत्र शौर्य तिवारी के भविष्य की सुरक्षा की भी मांग की गई। उप जिलाधिकारी ने जिलाधिकारी व अपर जिलाधिकारी से फोन पर वार्ता कर परिजनों की मांगों से अवगत कराया।
वार्ता के बाद प्रशासन ने आश्वासन दिया कि आर्थिक सहायता के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा, मृतक की पत्नी दीपमाला को आंगनबाड़ी में नौकरी दी जाएगी तथा पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच कराई जाएगी।
आखिरकार हुआ अंतिम संस्कार
प्रशासनिक और जनप्रतिनिधियों के आश्वासन के बाद परिजन शांत हुए। देर शाम सरवन क्षेत्र धाम पर शव का अंतिम संस्कार किया गया। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए गांव और अंतिम संस्कार स्थल पर देर रात तक पुलिस बल तैनात रहा।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
मृतक की मां, पत्नी दीपमाला और पुत्र शौर्य तिवारी का रो-रोकर बुरा हाल था। शव से लिपटकर पत्नी और मां बार-बार बेहोश हो रही थीं। मृतक तीन भाइयों में मंझला था। बड़ा भाई अनिल तिवारी लद्दाख में तैनात है, जबकि छोटा भाई सुनील तिवारी असम में भारतीय सेना में सेवाएं दे रहा है। छोटा भाई तो देर रात घर पहुंच गया, लेकिन बड़ा भाई समय से न पहुंच पाने के कारण अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सका। जेल में हुई इस मौत को लेकर क्षेत्र में अब भी चर्चाओं का दौर जारी है और लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।