◆ शिक्षा विभाग ने प्राथमिक जांच के बाद की कार्रवाई, दोनों पक्षों के बीच समझौते की चर्चा से मामले ने पकड़ा तूल
जलालपुर, अंबेडकर नगर। मालीपुर थाना क्षेत्र के सुरहुरपुर स्थित जूनियर विद्यालय में कक्षा छह की 11 वर्षीय छात्रा के साथ अश्लील हरकत करने के आरोप में घिरे प्रधानाध्यापक संतोष कुमार दुबे को बेसिक शिक्षा विभाग ने निलंबित कर दिया है। प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी जलालपुर हिमांशु मिश्र की प्राथमिक जांच आख्या मिलने के बाद विभाग ने यह कार्रवाई की। मामले में तीन सदस्यीय जांच टीम भी गठित की गई थी। उधर, शिकायत के बाद पुलिस स्तर पर दोनों पक्षों के बीच समझौता होने की चर्चा से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
विद्यालय में छात्रा के साथ अश्लील हरकत का आरोप
मामले के अनुसार, छात्रा की मां ने आरोप लगाया था कि 10 अक्टूबर को विद्यालय में छात्रा को अकेला पाकर प्रधानाध्यापक ने उसके साथ अश्लील हरकत की। विरोध करने या किसी को जानकारी देने पर छात्रा को जान से मारने और विद्यालय से निकालने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया। घर पहुंचने पर छात्रा ने परिजनों को आपबीती बताई, जिसके बाद परिवार ने शिकायत कर कार्रवाई की मांग की थी।
परिजनों ने यह आरोप भी लगाया था कि शिकायत करने पर उनके साथ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए गाली-गलौज की गई और जान से मारने की धमकी दी गई। मामला पुलिस तक पहुंचा, लेकिन बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता होने की बात सामने आई। हालांकि, समझौता किन परिस्थितियों में हुआ और पुलिस ने शिकायत पर क्या कानूनी कार्रवाई की, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
विभागीय कार्रवाई के बाद पुलिस की भूमिका पर सवाल
शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्राथमिक जांच के आधार पर प्रधानाध्यापक को निलंबित कर दिया। वहीं, पुलिस स्तर पर समझौते की चर्चा ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि जब शिकायत एक नाबालिग छात्रा से कथित अश्लील हरकत से जुड़ी थी, तो पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद क्या कदम उठाए? क्या पीड़िता और उसके परिजनों के बयान दर्ज किए गए तथा आरोपों की प्रकृति के अनुरूप कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई?
नाबालिग से संबंधित कथित यौन अपराध के मामलों में केवल दोनों पक्षों के बीच समझौता हो जाने से आपराधिक कार्रवाई स्वतः समाप्त नहीं हो जाती। ऐसे मामलों में आरोपों की प्रकृति के अनुसार कानून के प्रावधानों का पालन करना आवश्यक है। इसलिए यह स्पष्ट होना जरूरी है कि पुलिस ने मामले में क्या कार्रवाई की और कथित समझौते का कानूनी प्रक्रिया पर कोई प्रभाव पड़ा या नहीं।
मामले में पीडिता की मां द्वारा दी गई तहरीर पर गुरूवार को पाक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।