◆ 25 अक्टूबर को संध्या आरती के बाद शुरू होंगे धार्मिक कार्यक्रम, उत्तरी चबूतरे पर संपन्न होंगे विशेष पूजन-अर्चन
अयोध्या। शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर 25 अक्टूबर को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला का विशेष पूजन-अर्चन किया जाएगा। इस दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार प्रभु को खीर का विशेष भोग अर्पित किया जाएगा। आयोजन को लेकर मंदिर की धार्मिक परंपराओं के अनुरूप तैयारियां की गई हैं। विशेष अनुष्ठानों के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण रहेगा।
श्रीराम मंदिर के धार्मिक व्यवस्था प्रमुख इंद्रदेव मिश्र ने बताया कि आयोजन की रूपरेखा तय कर ली गई है। अर्चक प्रमुख आचार्य केशव जी की उपस्थिति में संध्या आरती के बाद विशेष धार्मिक अनुष्ठान शुरू होंगे। परंपरा के अनुसार श्रीरामलला के चल विग्रह को गर्भगृह से बाहर स्थित उत्तरी चबूतरे पर ले जाया जाएगा। वहीं शरद पूर्णिमा के विशेष पूजन-अर्चन संपन्न होंगे। इस अवसर पर पारंपरिक पदगायन और भजनों से वातावरण भक्तिमय होगा।
चांदनी रात में खीर अर्पित करने की परंपरा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणों में अमृत तत्व विद्यमान रहता है। इसी आस्था के चलते खीर को खुले आकाश के नीचे चांदनी में रखा जाता है और मध्यरात्रि के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। इसे आरोग्य, सुख और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।
सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम
विशेष पूजन के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा पर भी ध्यान दिया जा रहा है। श्रीराम मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र (सेवानिवृत्त) ने संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को आवश्यक सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि श्रद्धालु शांतिपूर्ण वातावरण में दर्शन-पूजन कर सकें। शरद पूर्णिमा का यह आयोजन रामलला की आराधना के साथ मंदिर की पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं और अनुष्ठानों का विशेष अवसर होगा।