Sunday, March 8, 2026
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उत्तर प्रदेश साहित्य सभा की मासिक काव्य गोष्ठी संपन्न


◆ मैं वह फूल नहीं जो कांटों की दुर्दशा देखूं — कवि तारकेश्वर मिश्र जिज्ञासु


अंबेडकरनगर। उत्तर प्रदेश साहित्य सभा अंबेडकरनगर के बैनर तले जोशी कंप्यूटर एंड कोचिंग इंस्टीट्यूट तमसा मार्ग अकबरपुर में भव्य मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। भूतपूर्व सैनिक संगठन के जिला अध्यक्ष संतराम मौर्य की अध्यक्षता एवं साहित्य सभा के जिलाध्यक्ष तारकेश्वर मिश्र जिज्ञासु के संचालन में आयोजित काव्य गोष्ठी के मुख्य अतिथि जौनपुर के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ मलय तिवारी तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में संरक्षक जिला भूतपूर्व सैनिक संगठन पी डी तिवारी , जिला उपाध्यक्ष भूतपूर्व सैनिक संगठन रामअवतार  मौर्य , जिला महामंत्री भूतपूर्व सैनिक संगठन सुरेंद्र नाथ वर्मा एवं आजमगढ़ से आए शिक्षक कवि देवेंद्र तिवारी देव रहे। अतिथियों के स्वागत के पश्चात गीत ग़ज़ल और मुक्तक से भरी महफ़िल रौनक हुई !  कवि अजय वर्मा अजय द्वारा वाणी वंदना प्रस्तुत की गई। अजय ने पढ़ा –ओ माता सरस्वती , मैं बुद्धिहीन कुमती करता हूं नमन तुझे दो आशीर्वचन मुझे। गोंडा से आए शिक्षक कवि रामवृक्ष बहादुरपुरी ने पढ़ा — जिधर देखता हूं उधर तू ही तू है। कवि देवेंद्र तिवारी देव ने पढ़ा — बाहर बैरी क्या कर लेते ,  अपनों से ही हार हुई। युवा कवि संजय सवेरा ने पढ़ा — हम भी शरीफ शहरी थे शहर के , अब क्या कहें तिल का ताड़ बना दिया लोगों ने। शिक्षक कवि भरत राम वर्मा गुल्लू ने अवधी गीत पढ़ा – हम न जाई देब सजन बंबई कमाई , हमहूं सुने हैं आतंकवादी बा छाई। कवि भगवान दीन यादव मुनि ने पढ़ा — अंतस में विचार है बाहर संसार है , अंतस में सद्भाव हो संसार से लगाव हो। उभरते हुए कवि विनीत शूरवीर ने पढ़ा — मैं मजदूर बालक हूं। तारकेश्वर मिश्र जिज्ञासु ने पढ़ा — तुम चाहो तो मुझसे रिश्ता जोड़ सकते हो , मैं वह फूल नहीं जो कांटों की दुर्दशा देखूं। योग प्रशिक्षक डॉ संतराम पांडेय ने पढ़ा —नदियों की बात मत पूछो नालों से डर लगता है , शैतानों की बात मत पूछो इंसानों से डर लगता है। मुख्य अतिथि डॉ मलय तिवारी ने पढ़ा –प्रियवर तेरा चित्र बनाकर पूजा उम्र तमाम की , लिख लिखकर गीतों में मैंने पाती तेरे नाम की। कवियों द्वारा प्रस्तुत गीत , ग़ज़ल और मुक्तक की दरिया में डुबकी लगाते हुए श्रोतागण कभी संजीदा तो कभी ठहाके वा आनंद में सराबोर हुए। उक्त कार्यक्रम में इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर सूरज जोशी अपने संबोधन में कार्यक्रम को बहुत ही सफल बताते हुए आए हुए कवियों / अतिथियों का आभार व्यक्त किया। साहित्य सभा के संरक्षक डॉ जनार्दन शुक्ल ने कवियों की प्रस्तुति को जमकर सराहा , साथ ही साथ आने वाले समय में एक भव्य अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के आयोजन का प्रस्ताव रखा। सैनिक संगठन के पदाधिकारी राम अवतार मौर्य ने कविता को देश और समाज की ज़रूरत बताते हुए एक वीर रस का गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ शिक्षक सुरेंद्र देव पांडेय , शिक्षक प्रदीप विश्वकर्मा एवं असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ विकास वर्मा आदि उपस्थित रहे।

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