अम्बेडकर नगर। दो वर्षों से कानून से भाग रहा, रिश्तों की मर्यादा को तार-तार करने वाला दोहरे हत्याकांड का मुख्य आरोपी आखिरकार पुलिस की गिरफ्त में आ गया। अपने ही पिता और बड़े भाई की नृशंस हत्या कर तथा मां पर जानलेवा हमला करने वाला 50 हजार रुपये का इनामिया रवि सोनी को पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी न केवल एक जघन्य अपराध का पटाक्षेप है, बल्कि यह संदेश भी है कि कानून की निगाह से कोई अपराधी हमेशा बच नहीं सकता।
अपर पुलिस महानिदेशक लखनऊ जोन और पुलिस महानिरीक्षक अयोध्या परिक्षेत्र के निर्देशों के क्रम में, पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में थाना कोतवाली अकबरपुर, स्वाट और सर्विलांस की संयुक्त टीम ने यह बड़ी सफलता हासिल की। अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी/पूर्वी के पर्यवेक्षण तथा क्षेत्राधिकारी नगर के समन्वय में पुलिस ने मुखबिर की सटीक सूचना पर गौहन्ना बाईपास से आरोपी को धर दबोचा।
वह दिन जिसने उजाड़ दिया पूरा परिवार
दो अगस्त 2023 का दिन इतिहास में एक भयावह अध्याय बनकर दर्ज हो गई। पारिवारिक विवाद और भीतर सुलगते आक्रोश ने उस दिन ऐसा हिंसक रूप लिया कि खून के रिश्ते भी नहीं बचे। आरोपी रवि सोनी ने ईंट और लोहे की रॉड से हमला कर अपने पिता कृष्णचन्द्र सोनी और बड़े भाई आनन्द सोनी की निर्ममता से हत्या कर दी। मां सुनीता देवी, जिन्होंने उसे जन्म दिया था, वे भी उसी हाथों से मौत के मुंह में धकेल दी गईं—हालांकि वह किसी तरह जीवन बचाने में सफल रहीं।
इस हृदयविदारक घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। मृतक के भतीजे दीपक सोनी की तहरीर पर कोतवाली अकबरपुर में मुकदमा दर्ज किया गया। घटना के बाद से आरोपी फरार चल रहा था, जिस पर पुलिस ने 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था।
गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि पारिवारिक कलह, चारित्रिक दोषों और ससुराल पक्ष से चले आ रहे विवाद ने उसके भीतर लंबे समय से मानसिक उथल-पुथल पैदा कर रखी थी। वही आक्रोश अंततः हिंसा में बदल गया और उसने इस अमानवीय अपराध को अंजाम दे डाला।
रवि सोनी पुत्र कृष्णचन्द्र सोनी, निवासी मोहल्ला शहजादपुर, थाना कोतवाली अकबरपुर को 21 दिसम्बर की रात गौहन्ना चौराहे से गिरफ्तार किया गया।
इस कार्रवाई में प्रभारी निरीक्षक श्रीनिवास पाण्डेय, स्वाट प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार पाण्डेय, उपनिरीक्षक विनोद यादव सहित पुलिस टीम की सतर्कता और निरंतर प्रयास निर्णायक रहे। यह गिरफ्तारी एक बार फिर यह प्रमाणित करती है कि चाहे अपराध कितना ही संगीन क्यों न हो, कानून की पकड़ अंततः अपराधी तक पहुंचती ही है।