◆ फिलीपींस की टीम भी बिखेरेगी सांस्कृतिक छटा, संस्कृति विभाग तैयार करेगा 10 से 15 मंच
अयोध्या। रामनगरी में आयोजित होने वाले दसवें दीपोत्सव में इस बार देश की भाषाई विविधता और अंतरराष्ट्रीय रामलीला परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। संस्कृति विभाग की ओर से छह और सात नवंबर को अयोध्या में 10 से 15 मंचों पर रामलीला का आयोजन प्रस्तावित है। इसमें पहली बार केरल, असम और जम्मू-कश्मीर की टीमें अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में रामलीला का मंचन करेंगी। वहीं, फिलीपींस की रामलीला टीम भी अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुति देगी। इसके अतिरिक्त उत्तराखंड और बंगाल की रामलीलाएं भी आकर्षण का केंद्र बनेंगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आयोजित होने वाले दीपोत्सव में रामलीला मंचन के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों और रामायण की सांस्कृतिक विरासत को व्यापक रूप में प्रस्तुत करने की तैयारी है। केरल की टीम मलयालम, असम की टीम असमिया और जम्मू-कश्मीर की टीम डोगरी भाषा में रामलीला का मंचन करेगी। विभिन्न भाषाओं में प्रस्तुत होने वाली रामलीलाओं से दर्शकों को देश के अलग-अलग क्षेत्रों की सांस्कृतिक परंपराओं और मंचन शैलियों को जानने का अवसर मिलेगा।
फिलीपींसकीटीमभीकरेगीमंचन
अयोध्या अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान के सलाहकार एवं विशेष कार्याधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने बताया कि दीपोत्सव में अंतरराष्ट्रीय रामलीला का आयोजन भी किया जाएगा। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के माध्यम से विदेशी रामलीला टीमों को आमंत्रित किया गया है। फिलहाल फिलीपींस की टीम की सहभागिता तय है। अन्य देशों की टीमों को भी शामिल करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य विभिन्न देशों में प्रचलित रामलीला परंपराओं को एक मंच पर लाना और भगवान श्रीराम के आदर्शों तथा रामायण की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करना है।
क्षेत्रीयभाषाओंमेंजीवंतहोंगेरामायणकेप्रसंग
दीपोत्सव में होने वाले रामलीला मंचन के माध्यम से रामायण के प्रमुख प्रसंगों को अलग-अलग भाषाओं और सांस्कृतिक शैलियों में जीवंत किया जाएगा। इससे दर्शकों को यह देखने का अवसर मिलेगा कि भाषाई और क्षेत्रीय विविधताओं के बावजूद रामायण देश-विदेश में सांस्कृतिक जुड़ाव का महत्वपूर्ण माध्यम बनी हुई है।
संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम दीपोत्सव के सांस्कृतिक आयाम को विस्तार देने के साथ विभिन्न राज्यों और देशों की रामलीला परंपराओं को अयोध्या में एक साझा मंच प्रदान करेगा।