Sunday, March 8, 2026
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मनोदबाव का सकारात्मक प्रबंधन न होने से बनता है डिस्ट्रेस


अयोध्या। देवा पब्लिक  इंटर कॉलेज उसरु अमौना में आयोजित “बोर्ड एग्जाम स्ट्रेस व साइकोसोमेटिक हेल्थ” विषयक कार्यशाला में मौजूद मुख्य अतिथि जिला चिकित्सालय के मनोपरामर्शदाता डा० आलोक मनदर्शन ने बताया कि स्ट्रेस या मनोदबाव का सकारात्मक प्रबन्धन न कर पाने पर स्ट्रेस नकारात्मक रूप ले लेता है जिसे डिस्ट्रेस या अवसाद कहा जाता है जिससे उलझन, बेचैनी, घबराहट, अनिद्रा आदि के साथ शारीरिक दुष्प्रभाव भी दिखाई पड़ते हैं जिसे साइकोसोमैटिक डिसऑर्डर कहते है ।

तीव्र मेन्टल स्ट्रेस से कार्टिसाल व एड्रेनिल हॉर्मोन बढ़ जाता है जिससे चिंता, घबराहट, आलस्य,पढ़ाई में मन न लगना,अनिद्रा, अतिनिद्रा,सरदर्द,पेट दर्द, चिड़चिड़ापन व नशे की स्थिति भी पैदा हो सकती है ।

ऐसी स्थिति होने पर क्या करें – मन के प्रत्येक भाव पीड़ा, तनाव, सुख, आनन्द, भय, क्रोध, चिंता, द्वन्द व कुंठा आदि का सीधा प्रभाव शरीर पर पड़ता है । चिंता व घबराहट यदि एक हफ्ते से ज्यादा महसूस होने पर मनोपरामर्श अवश्य लें । स्वस्थ, मनोरंजक व रचनात्मक गतिविधियों तथा फल व सब्जियों का सेवन को बढ़ावा देते हुए योग व व्यायाम को दिनचर्या में शामिल कर आठ घन्टे की गहरी नींद अवश्य लें । इस जीवन शैली से मस्तिष्क में हैप्पी हार्मोन सेरोटोनिन, डोपामिन व एंडोर्फिन का संचार होगा जिससे दिमाग व शरीर दोनों स्वस्थ रहेंगे तथा , परीक्षार्थी एग्जाम फोबिक नही वरन एग्जाम फ्रेंडली बनेंगे।

कार्यशाला में प्रतिभागियों के संशय व सवालों का समाधान का भी किया गया जिसमें चेयरमैन सहदेव उपाध्याय ,निदेशक अजय उपाध्याय, प्रधानाचार्या नमिता मिश्रा व संयोजक ऋतु त्रिपाठी सहित बोर्ड परीक्षार्थी मौजूद रहे।

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