◆ श्रीराममंदिर के चारों द्वार होंगे चार महान संतों के नाम पर : योगी आदित्यनाथ
◆ अयोध्या के बृहस्पति कुंड पर तीन दक्षिण भारतीय संतों की प्रतिमाओं का हुआ अनावरण
अयोध्या । अयोध्या के पवित्र बृहस्पति कुंड पर बुधवार को आयोजित ऐतिहासिक समारोह में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दक्षिण भारत के तीन महान संगीत संतों—श्री त्यागराज स्वामीगल, श्री पुरंदरदास और श्री अरुणाचल कवि—की भव्य प्रतिमाओं का अनावरण किया। आयोजन में उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक एकता, रामभक्ति की परंपरा दिखाई दी।
राम केवल उत्तर भारत में नहीं, दक्षिण के हर घर में विराजते हैं — निर्मला सीतारमण
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने भावनात्मक उद्बोधन में कहा कि “रामभक्ति केवल हिंदी भाषी क्षेत्रों की नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत की आत्मा है। राम केवल उत्तर भारत में नहीं, दक्षिण के हर घर में विराजते हैं।” उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत में श्रीराम भक्ति आस्था नहीं, जीवन का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि पहले दक्षिण भारत में भाषाई भेदभाव नहीं था — तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और संस्कृत सभी भाषाओं में कर्नाटक संगीत गाया जाता था। यह हमारी एकता का प्रतीक था।
त्यागराज स्वामी का स्मरण करते हुए वित्त मंत्री ने कहा, उन्होंने गरीबी में भी श्रीराम के लिए गीत गाये, राजा के गुणगान से इंकार किया। लोगों का मानना है कि हनुमान जी ने ही त्यागराज के रूप में जन्म लिया था। सीतारमण ने बताया कि केरल में आज भी पूरे अषाढ़ मास (सिंह मास) में प्रत्येक घर में दीप जलाकर श्रीराम की आराधना की जाती है और वाल्मीकि रामायण का पाठ होता है। उन्होंने कहा, रामभक्ति भारत की अमूर्त आत्मा है, जो हर भाषा में झलकती है — तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम हर भाषा में श्रीराम की महिमा का गान हुआ है।
उन्होंने कहा कि जिन संतों की हर श्वास में ‘राम’ था, उनकी प्रतिमाओं का अयोध्या में स्थापित होना केवल योग से नहीं, बल्कि श्रीराम की इच्छा से संभव हुआ है। कहा कि हमें लगा ही नहीं कि हम उत्तर भारत में हैं, ऐसा लगा जैसे अपने घर में समारोह कर रहे हों।
महान संतों के नाम पर जाने जाएंगे श्रीराममंदिर के चारो द्वार : योगी आदित्यनाथ
इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की कि श्रीराममंदिर के चारों प्रमुख द्वार देश के चार महान संतों के नाम पर होंगे —
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दक्षिण दिशा का द्वार जगद्गुरु शंकराचार्य के नाम पर,
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दक्षिण-पूर्व द्वार (गेट नंबर-3) जगद्गुरु माधवाचार्य के नाम पर,
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उत्तर दिशा का द्वार जगद्गुरु रामानुजाचार्य के नाम पर,
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और सुग्रीव किला मार्ग से प्रवेश द्वार जगद्गुरु रामानंदाचार्य के नाम पर समर्पित किया जाएगा।





