अयोध्या। नवरात्रि के पावन अवसर पर पूजा-पाठ, भक्ति और उपवास का सीधा असर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक रूप से पड़ता है। जिला चिकित्सालय के मनोविश्लेषक डॉ. आलोक मनदर्शन ने बताया कि नवरात्रि के दौरान लोगों की दिनचर्या, खानपान और मानसिक स्थिति में बदलाव आता है, जिससे मन को शांति और संतुलन मिलता है।
उन्होंने बताया कि पूजा, प्रार्थना और भक्ति से तनाव पैदा करने वाला हार्मोन कॉर्टिसोल कम होता है, जबकि मन को शांत रखने वाले हार्मोन जैसे सेरोटोनिन और एंडोर्फिन बढ़ते हैं। इससे व्यक्ति को खुशी, संतोष और मानसिक मजबूती महसूस होती है। मंदिरों में सामूहिक पूजा और भजन-कीर्तन से आपसी जुड़ाव भी बढ़ता है, जिससे अकेलापन और तनाव कम होता है।
डॉ. मनदर्शन के अनुसार, नवरात्रि में होने वाले भक्ति संगीत, जागरण और नृत्य से शरीर में ऊर्जा और उत्साह का संचार होता है। इससे व्यक्ति के अंदर सकारात्मक सोच विकसित होती है और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है।
उन्होंने यह भी बताया कि नवरात्रि के दौरान रखा जाने वाला व्रत या उपवास आधुनिक चिकित्सा पद्धति के इंटरमिटेंट फास्टिंग के समान है। इसमें सीमित और हल्का भोजन करने से शरीर को आराम मिलता है और मोटापा, उच्च रक्तचाप तथा मधुमेह जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। उनका कहना है कि नवरात्रि केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि यह मन और शरीर दोनों को संतुलित रखने का एक प्राकृतिक माध्यम भी है।