◆ महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने छठवें राज्य वित्त आयोग के समक्ष रखीं नगर निगम की जरूरतें
अयोध्या। धार्मिक और पर्यटन नगरी अयोध्या की बढ़ती जरूरतों के मद्देनजर महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने नगर निगम का मासिक बजट तीन गुना बढ़ाने की मांग की है। 14 अक्टूबर को लखनऊ के ताज होटल में छठवें राज्य वित्त आयोग की समिति के समक्ष उन्होंने नगर निगम की वित्तीय स्थिति, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और नगरीय सेवाओं के संचालन से जुड़ी जरूरतों को रखा। इस दौरान वित्त मंत्री सुरेश खन्ना भी मौजूद रहे।
महापौर ने कहा कि अयोध्या में प्रतिदिन लगभग एक लाख श्रद्धालुओं और सालाना चार करोड़ से अधिक पर्यटकों का आवागमन होता है। इतनी बड़ी संख्या में आने वाले लोगों के लिए सफाई, पेयजल, प्रकाश और अन्य नागरिक सुविधाओं की व्यवस्था करना नगर निगम की जिम्मेदारी है। सीमित वित्तीय संसाधनों के कारण इन व्यवस्थाओं को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि पंचम राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के तहत 10 से 20 लाख आबादी वाली श्रेणी में होने के बावजूद अयोध्या नगर निगम को जरूरतों के अनुरूप धनराशि नहीं मिल पा रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य वित्त आयोग से मिलने वाला मासिक आवंटन समान श्रेणी के अन्य नगर निगमों की तुलना में लगभग एक तिहाई है। वहीं, नगर निगम में कर्मचारियों की संख्या पहले की तुलना में दोगुनी से अधिक होने के कारण अवस्थापना संबंधी खर्च भी बढ़ा है। इन परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने मासिक बजट तीन गुना करने की मांग रखी।
धार्मिक मेलों के लिए अलग बजट की मांग
महापौर ने मकर संक्रांति, वसंत पंचमी, चैत्र रामनवमी, सावन झूला, दीपोत्सव, विभिन्न परिक्रमा और कार्तिक पूर्णिमा जैसे आयोजनों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रमुख धार्मिक अवसरों पर एक दिन में 40 से 50 लाख तक श्रद्धालुओं का आवागमन होता है। ऐसे समय सफाई, पेयजल, प्रकाश और अन्य नागरिक सुविधाओं के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ते हैं। उन्होंने धार्मिक आयोजनों और मेलों के लिए राज्य वित्त आयोग से अलग धनराशि आवंटित करने का आग्रह किया।
एसटीपी के रखरखाव के लिए भी मांगी धनराशि
महापौर ने बताया कि नगर में तीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) संचालित हैं। इनके वार्षिक अनुरक्षण पर जल निगम के माध्यम से लगभग 13.75 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। अनुरक्षण अवधि समाप्त होने के बाद इन संयंत्रों के रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निगम पर आने की स्थिति में अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों की जरूरत होगी। उन्होंने इसके लिए अलग बजट उपलब्ध कराने की मांग की। स्वच्छता और अन्य नगरीय कार्यों में इस्तेमाल होने वाले वाहनों के संचालन तथा नागरिक सुविधाओं के विस्तार के लिए भी अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता बताई।
तीन साल में बढ़ी नगर निगम की आय
महापौर ने नगर निगम की आय बढ़ाने के लिए किए गए प्रयासों का भी ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में सर्वेक्षण के बाद भवनों को कर के दायरे में लाने की पहल की गई। इसके परिणामस्वरूप कर निर्धारण वाले भवनों की संख्या 45,643 से बढ़कर 61,915 हो गई।
उनके अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में नगर निगम की आय 55.96 करोड़ रुपये थी, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 में बढ़कर 70.53 करोड़ रुपये हो गई। वित्तीय वर्ष 2026-27 में लगभग 100 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। कर संग्रह को आसान बनाने के लिए ऑनलाइन भुगतान और घर-घर संग्रहण की व्यवस्थाएं भी शुरू की गई हैं।
महापौर ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर भगवान राम के जीवन प्रसंगों पर आधारित वैक्स म्यूजियम के संचालन को भी आय बढ़ाने की पहल बताया। उन्होंने आयोग से अयोध्या की धार्मिक महत्ता, श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ती नागरिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने का आग्रह किया, ताकि नगरीय सुविधाओं के साथ स्वच्छता और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।