◆ केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने किया कार्यक्रम का उद्घाटन
अयोध्या। तीरंदाजी यानी धनुष बाण प्राचीन शस्त्रों में से एक है। यह हमें अपनी प्राचीन संस्कृति और सभ्यता से जोड़ता है। तीरंदाजी हमारे प्राचीनतम शस्त्र के नाते विशेष स्थान रखता है। यह हमें हमारे वैभव और गौरव की याद दिलाता है। यह हमारी धरोहर है। उपरोक्त बातें राष्ट्रीय तीरंदाजी संघ के अध्यक्ष केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने एनटीपीसी राष्ट्रीय सीनीयर तीरंदाजी प्रतियोगिता के उद्घाटन के अवसर पर कही। वह मुख्य अतिथि के रूप में उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने भारतीय तीरंदाजी संघ और उत्तर प्रदेश तीरंदाजी संघ के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय सीनियर तीरंदाजी प्रतियोगिता का उद्घाटन तीर चलाकर लक्ष्य भेद से किया।

उन्होंने अपने उद्घाटन उद्बोधन में कहा कि यह अयोध्या की धरती है, जिससे निकल तक भगवान श्रीराम ने अपने धनुष बाण के साथ मर्यादा का पालन करते हुए दुष्टों का नाश किया। यहां इस प्रतियोगिता का आयोजन हमें हमारे लक्ष्य से जोड़ने की दिशा में आगे ले जाएगा, जिसके तहत 2047 तक वैभवशाली भारत, शक्तिशाली भारत, एक भारत श्रेष्ठ भारत के स्वप्न को साकार करने का स्वप्न साकार करना है। तीरंदाजी इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। एशियाई खेलों में 111 पदक जहां राष्ट्रीय गौरव का विषय हैं, वहीं बीते तीन सालों में तीरंदाजी में 195 अंतराष्ट्रीय पदक आए हैं, जिसमें 85 स्वर्ण पदक हैं। यह गौरव किसी खेल को प्राप्त नहीं हुआ है। पैरा एशियाई खेलों में भी दो स्वर्ण, तीन रजत और दो कांस्य पदक आए हैं। एक प्रतिभागी ने पैर से तीर चला कर स्वर्ण पदक जीता। पदक तालिका में जहां हम 15 वें स्थान पर होते थे, अब पांचवे स्थान पर पहुंच गए हैं। खेल के लिए अंतराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं और उपकरण उपलब्ध कराने का प्रयास प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत सरकार की ओर से चल रहा है। उनका विशेष ध्यान खेलों में भारत को आगे ले जाने पर है। तीरंदाजी में देश में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। आज देश में 15 से अधिक तीरंदाजी प्रतियोगिताएं हो रही हैं। जोनल और प्रांत स्तर की प्रतियोगिताएं इसमें शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री गिरीश चंद्र यादव ने उद्घाटन समारोह में अपने संबोधन में कहा कि उत्तर प्रदेश ने खेलों में उल्लेखनीय प्रगति की है। यह अनायास नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा निर्देशों पर चल रहे कार्यों का परिणाम है। खेलों के प्रति सरकार के सरोकार का पता इससे ही चलता है कि केंद्र सरकार ने खेलों का बजट एक हजार करोंड़ से बढ़ा कर तीन हजार करोंड़ कर दिया है। उत्तर प्रदेश में कोई खेल नीति नहीं थी। खेल नीति बनी। विकास खंड स्तर पर मिनी स्टेडिटम बना कर गांव स्तर पर खेलों को प्रोत्साहित करने का कार्य प्रगति पर है। अंतराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं के लिए पांच हाई परफार्मेंस और एक्सीलेंस सेंटर बनाए जा रहे हैं। वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम आकार ले रहा है। पदक लाने वाले खिलाड़ियों को क्लास टू की नौकरी देने का मार्ग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयास से सफल हुआ। एक प्रतिभागी पारुल चौधरी जो दौड़ में बहुत पीछे चल रही थी, इस नीति से प्रेरित होकर वह स्वर्ण पदक विजेता बनी, उसे हम शीघ्र ही नौकरी देने जा रहे हैं। पदक विजेताओं को प्रोन्नति देने का भी प्राविधान किया गया है। फलस्वरूप भारत की पदक संख्या में 25 फीसदी योगदान उत्तर प्रदेश का है। हर खेल में हम योगदान दे रहे हैं।




